सात देशों के साथ सुरक्षा मजबूत करने की तैयारी, भारत में पुलिस कार्रवाई पर विपक्ष ने उठाए सवाल

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BIMSTEC की पहली गृह मंत्रियों की बैठक में अमित शाह का बड़ा संदेश, क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से मुकाबले पर जोर; प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर उद्धव ठाकरे ने केंद्र को घेरा

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। क्षेत्रीय सहयोग, राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर देश की राजनीति में एक साथ दो अहम मुद्दे चर्चा में हैं। एक ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में BIMSTEC देशों के गृह मंत्रियों की पहली बैठक के जरिए क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग को मजबूत करने की पहल की जा रही है, वहीं दूसरी ओर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने दिल्ली और मुंबई में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। इन दोनों घटनाक्रमों ने सुरक्षा व्यवस्था, शांतिपूर्ण विरोध और सरकार की जवाबदेही से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।
अमित शाह की अध्यक्षता में जुटे सात देशों के प्रतिनिधि
BIMSTEC यानी बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन की पहली गृह मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इस क्षेत्रीय संगठन में भारत, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं। बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी मेजबानी को भारत के लिए गर्व और सौभाग्य का विषय बताया।
अमित शाह ने कहा कि BIMSTEC क्षेत्रीय एकीकरण, आर्थिक सहयोग और सामूहिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उनके मुताबिक, सदस्य देशों के बीच बेहतर तालमेल से न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और संबंधित एजेंसियों की कार्यक्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से सहयोग का संदेश
गृह मंत्री ने भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ शांति, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने तथा मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने में विश्वास करता है।
अमित शाह ने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्रीय सहयोग केवल बैठकों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे ऐसे व्यावहारिक कदमों में बदलने की जरूरत है, जिनका लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे और सदस्य देशों की सुरक्षा एजेंसियां साझा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
प्रधानमंत्री मोदी के संदेश को आगे बढ़ाने की कोशिश
गृह मंत्री ने 4 अप्रैल 2025 को आयोजित छठे BIMSTEC शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि BIMSTEC केवल क्षेत्रीय सहयोग का मंच नहीं, बल्कि समावेशी विकास और सुरक्षा को बढ़ावा देने का माध्यम भी है।
बैठक से पहले सदस्य देशों के गृह मंत्रालयों के सचिवों की बैठक भी हुई। नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के बजाय भारत में नेपाल दूतावास की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अधिकारियों ने गृह मंत्रियों की बैठक में प्रस्तुत किए जाने वाले एजेंडे पर चर्चा की। इस प्रारंभिक बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच विचार-विमर्श को व्यवस्थित करना और साझा प्राथमिकताओं पर सहमति बनाने की दिशा में आगे बढ़ना था।
क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों, सीमापार अपराध और विभिन्न देशों की एजेंसियों के बीच समन्वय जैसे विषय ऐसे क्षेत्रीय मंचों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हालांकि, बैठक में किन मुद्दों पर अंतिम सहमति बनी और कौन-से ठोस निर्णय लिए गए, इसकी पुष्टि आधिकारिक निष्कर्षों से ही होगी।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर उद्धव ठाकरे की पार्टी का हमला
दूसरी ओर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने केंद्र सरकार और प्रशासन पर प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती से पेश आने का आरोप लगाया है। पार्टी ने दिल्ली और मुंबई में छात्रों, महिलाओं तथा पत्रकारों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से देश में असंतोष बढ़ सकता है।
पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना की गई। संपादकीय में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादतियों पर शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी चिंताजनक है। पार्टी ने प्रशासन की कार्रवाई को जरूरत से ज्यादा कठोर बताते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की।
संपादकीय में यह भी दावा किया गया कि विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके ने हालात को गंभीर बना दिया है। पार्टी ने इसे गृह युद्ध जैसी स्थिति पैदा करने वाला बताया। हालांकि, यह विपक्षी दल की राजनीतिक टिप्पणी और आरोप हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन की चुनौती
BIMSTEC की बैठक और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर उठे राजनीतिक सवाल अपने-अपने संदर्भ में अलग हैं, लेकिन दोनों के केंद्र में सुरक्षा, प्रशासनिक जिम्मेदारी और नागरिकों का भरोसा जैसे मुद्दे हैं। एक तरफ देशों के बीच सहयोग बढ़ाकर क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश हो रही है, तो दूसरी तरफ देश के भीतर विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की भूमिका पर बहस जारी है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। वहीं शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। किसी भी कार्रवाई की निष्पक्षता का आकलन तथ्यों, कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि BIMSTEC बैठक से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कौन-से ठोस कदम सामने आते हैं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उठे सवालों पर केंद्र तथा संबंधित प्रशासन क्या प्रतिक्रिया देते हैं। क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग और देश के भीतर लोकतांत्रिक विश्वास, दोनों ही मजबूत शासन व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं।

Editor CP pandey

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