संघीय ढांचे पर सियासी टकराव: विकसित भारत कानून को लेकर पंजाब विधानसभा पर शिवराज सिंह चौहान का तीखा प्रहार
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा द्वारा संसद से पारित विकसित भारत -रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के विरोध में एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने और प्रस्ताव पारित करने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे भारत के संघीय ढांचे की मूल भावना के विरुद्ध करार दिया और कहा कि संसद द्वारा बनाए गए कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित करना संवैधानिक संतुलन को कमजोर करता है।
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक पर लोकसभा में व्यापक और गहन चर्चा हुई थी। उनके अनुसार, आठ घंटे से अधिक समय तक चली बहस में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सांसदों ने अपने-अपने सुझाव रखे। चौहान ने कहा कि वे स्वयं हर सांसद के सुझावों को गंभीरता से नोट कर रहे थे और विपक्ष को आश्वस्त किया गया था कि सभी बिंदुओं पर सरकार की ओर से जवाब दिया जाएगा। बावजूद इसके, विपक्ष ने चर्चा के बजाय हंगामे का रास्ता चुना, जिससे संसद की मर्यादा को ठेस पहुंची।
केंद्रीय मंत्री ने सवाल उठाया कि जब संसद में विधायी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ कानून प्रभावी हो गया है, तब किसी राज्य विधानसभा द्वारा उसके विरोध में प्रस्ताव पारित करना किस संवैधानिक भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि संघीय व्यवस्था सहयोग और समन्वय पर आधारित होती है, टकराव पर नहीं।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 को स्वीकृति दी है। यह अधिनियम ग्रामीण भारत में रोजगार सुरक्षा को नया आयाम देता है। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को अब प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों तक वैधानिक मजदूरी रोजगार की गारंटी मिलेगी। यह प्रावधान पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह एक आधुनिक और सशक्त वैधानिक ढांचा प्रस्तुत करता है।
सरकार का कहना है कि यह कानून केवल रोजगार सृजन तक सीमित नहीं है, बल्कि सशक्तिकरण, समावेशी विकास, विभिन्न योजनाओं के अभिसरण और संतृप्ति-आधारित वितरण को बढ़ावा देता है। इसका उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप एक आत्मनिर्भर, लचीले और समृद्ध ग्रामीण भारत की नींव मजबूत करना है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों, जिम्मेदारियों और संघीय संतुलन पर बहस को तेज कर दिया है।
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