जब मित्रता टूट जाती है, संसार
में सच्चे इंसान तब दुःखी होते हैं,
झूठे इंसान दुख के समय मित्र को
छोड़ कर दूर दूर खड़े नज़र आते हैं।
प्राय: ऐश्वर्य की अधिकता में मित्रों
और शत्रुओं की वृद्धि हो जाती है,
वहीं ज्ञान और विवेक जब बढ़ जाये,
तो बस मित्रों की संख्या बढ़ जाती है।
जीवन के खेल में नैतिकता वैसे ही
ज़रूरी होती है जैसे वजीर शतरंज
के खेल में बचा कर रखा जाता है,
इनके जाते ही सर्वनाश हो जाता है।
बाँसुरी में कई छेद क्रम से होते हैं,
और वह अंदर से खोखली होती है,
पर बाँसुरी से संगीत श्रवण होता है,
हमारा जीवन बाँसुरी जैसा होता है।
आदित्य मानव जीवन में जब प्रकृति
के सभी सामाजिक, नैसर्गिक व
नैतिक नियमों का पालन होता है,
तब सुचारू पूर्वक आगे बढ़ता है।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
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