देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। गुरुवार को शहर में स्थित लक्षीराम पोखरा, परमार्थी पोखरा, हनुमान मंदिर के पास रानी पोखरा तथा शहर के विभिन्न घाटों पर बने बेदी पर छठ मैया की उपासना कर व्रती महिलाएं डूबते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर अपने परिवार और अपने संतान लंबी उम्र की कामना की। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी, जगह-जगह महिला पुलिस की तैनाती की गई थी जिसे कोई अप्रिय घटना ना हो सके इसके साथ ही जिले के पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा,जिला अधिकारी दिव्या मित्तल व उप जिलाधिकारी ने भी जिले के सभी जगह पर ड्रोन कैमरा से पुरी व्यवस्था पर कमान संभाले रखें। छठ क्यों मनाते हैं ?और क्यों डूबते हुए भगवान सूर्य को अर्घ देकर उनकी उपासना की जाती है। हिंदू धर्म में उगते हुए सूर्य को तो सभी जल देते हैं, लेकिन छठ पूजा के दौरान तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है। ऐसा क्यों? आइए जानते हैं कि, छठ पूजा पर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे क्या मान्यता है। छठ महापर्व खासतौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। चार दिवसीय यह महापर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है। यह पर्व दीपावली के छः दिन बाद आता है। हर साल छठ पूजा का आरंभ कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से हो जाता है और सप्तमी तिथि पर इसका समापन होता है। पहले दिन नहाय-खाय की परंपरा के साथ इस पर्व की शुरुआत होती है और दूसरे दिन खरना की रस्म पूरी की जाती है। छठ पूजा के तीसरे दिन यानी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसका बाद चौथे दिन सप्तमी तिथि को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का समापन हो जाता है।
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