अधिकारी बना रहे सरकार के विरुद्ध माहौल-अध्यक्ष

ठेकेदारों का विभागीय अधिकारी कर रहे शोषण

मुख्यमंत्री के नाम खुला पत्र लिख निराकरण कराने का सघ का प्रयास-शरद सिंह

लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा) वर्तमान में शासन में बैठे कुछ अधिकारी सरकार को सही बातों का सज्ञान न देकर गुमराह कर सरकार का फजीहत करा रहे है ,और जानबूझकर के सरकार के विरुद्ध एक माहौल बना रहे । जनता अपनी सही बातों के लिए ही आंदोलन कर रही है,यही नही सरकार को सही बातों को अधिकारी नही बता सिर्फ गुमराह कर रहे है। सरकार के दावे सबका साथ सबका विकास के दावे को खोखला दावा जनमानस के बीच करार दे रहे है उनके उचित माँग को दबा कर सरकार के विपरीत एक अपनी नीति निर्धारण कर सिक्का चला सरकार व जनता बीच खाई बना रहे हैं। राजकीय ठेकेदारो की भी एक समस्या में अधिकारियों की नीति भी सरकार के विरोध का आभास करा रही हैं जिसके कारण अब ठेकेदार आर पार की लड़ाई लड़ने के मूड में है,ठेकेदार संघ समस्याओं के संबंध में मुख्यमंत्री को मिलकर अपनी समस्या से अवगत कराने की ठान लिया है। साथ ही अधिकारी शासन को गुमराह कर गलत निर्णय को भी सही साबित कर शासनादेश के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं ।

● आप को बता दे पहले रॉयल्टी के संबंध में है रॉयल्टी का सत्यापन नंबर के आधार पर होने के कारण रॉयल्टी का नंबर लेकर के कोई भी उसका सत्यापन कर ले रहा है और मूल व्यक्ति मूल रॉयल्टी प्रपत्र लेकर के 6 गुना दंड दे रहा है जबकि पूर्व में राजकीय कार्यों के ठेकों में रॉयल्टी ठेकेदारों के देयक से कट जाते थे इस प्रकार से नई व्यवस्था के कारण राजकीय ठेकेदारों का भरपूर शोषण कर किया जा रहा है साथ ही साथ मूल प्रपत्र वाला ही दोषी होकर दंड भी दे रहा है
●दूसरी व्यवस्था सीसीएल प्रणाली समाप्त कर कोषागार आधारित ऑनलाइन बजटीय प्रणाली लागू होने के फल स्वरुप डिपॉजिट पार्ट 2 डिपॉजिट पार्ट 4 के डिपॉजिट की भुगतान आज तक लंबित है नई व्यवस्था में इसकी कोई व्यवस्था नहीं की गई है इस प्रकार से जल्दी बाजी में की गई व्यवस्था के कारण हजारों करोड़ों रुपए ठेकेदार के जो की जमानत के धनराशि के रूप में विभाग में था का भुगतान पिछले 3 वर्षों से नहीं हो पा रहा है ।
●तीसरी व्यवस्था तत्कालीन 5 साल अनुरक्षण की व्यवस्था निर्माण कार्यों में लागू की गई है, अनुरक्षण का सारा व्यवस्था नियम और शर्तें pmgsy की ली गई है किंतु दरे उसकी नहीं ली गई लोक निर्माण विभाग के 3 .75 मीटर की सड़क के अनुरक्षण का दर 1.25 लाख +18 प्रतिशत जीएसटी दी जा रही है। जबकि वहीं पीएमजीएसवाई मे 7.29 लाख + 18% जीएसटी है एक ही तकनीक से बनी मार्गों की अनुरक्षण में इतना भारी अंतर है,इस तमाम समस्याएं जो सामने दिख रही हैं एकदम सही है जिसके कारण ठेकेदार उत्पीडित हो रहा है,ठेकेदारो का शोषण तीन-चार सालों से हो रहा है, इस प्रकरण पर सघ खंड से लेकर प्रमुख अभियंता कार्यालय तक यही नही विभागीय सचिव से लेकर मुख्य सचिव तक शासन से लेकर के प्रशासन तक हर जगह गुहार लगाकर थक चुका है । स्थिति वही की वही है अब ठेकेदार मुख्यमंत्री से गुहार लगाने के साथ इस मामले को संज्ञान में डालने का मन बना चुका है । कुछ वर्षों में उच्च आधिकारिक गणों द्वारा रोज नित्य ने प्रयोग कर रोज नए नियम बनाए जा रहे हैं ।अपने ही बनाए गए नियमों को तोड़ा मरोड़ा जा रहा है ।कभी चरित्र प्रमाण पत्र 3 वर्ष के लिए जारी करने का शासनादेश होता है तो कभी उसी को 2 वर्ष कर दिया जाता है। कभी वित्तीय हस्त पुस्तिका को भी ना मानकर नए शासनादेश जारी कर वित्तीय हस्त पुस्तिका के विरुद्ध 10% जमानत धनराशि निविदाओं में ली जाती है, जो प्रदेश क्या पूरे देश में किसी भी कार्य संस्थानों में नहीं ली जाती इसी प्रकार निविदा आमंत्रित करने की तिथियां में भी जो प्रत्येक माह के 15 एवं 25 की तिथि में थी को शिथिल करके अब मन के प्रत्येक तिथि को निविदा आमंत्रित करने का आदेश जारी कर और अव्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है।ठेकेदार सघ के अध्यक्ष शरद सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री ही विकल्प हैं ।उन्होंने कहा की ठेकेदारों को बहुत आशाएं हैं ।मुख्यमंत्री से संघ समस्याओं के निराकरण हेतु निर्देश देने माँग कर निराकरण करने की माँग रखेगा।

Editor CP pandey

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