वर्ल्ड (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।हर साल की तरह इस बार भी अक्टूबर की शुरुआत नोबेल पुरस्कारों (Nobel Prize 2025) की घोषणाओं से हुई। विज्ञान, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले प्रतिभाओं के नाम घोषित किए गए।
लेकिन इस साल सिर्फ विजेताओं के नाम ही नहीं, बल्कि उन तक यह खबर पहुंचने के दिलचस्प तरीके भी सुर्खियों में हैं। किसी के दरवाजे पर सुबह 4 बजे दस्तक हुई, किसी ने स्वीडन से आया कॉल स्पैम समझकर काट दिया, तो किसी को जंगलों के बीच घंटों बाद अपनी जीत की जानकारी मिली।
सुबह-सुबह दरवाजे पर हुई दस्तक से मिली नोबेल की खबर
सीएटल की वैज्ञानिक मैरी ई. ब्रंकॉव के घर सुबह 4 बजे किसी ने दस्तक दी। पहले उनका कुत्ता ज़ेल्डा भौंका, फिर दरवाजे पर मौजूद एसोसिएटेड प्रेस की फोटोग्राफर ने उनके पति रॉस कॉलक्व्हौन को बताया –
“आपकी पत्नी ने नोबेल प्राइज जीता है।”
पहले तो मैरी को यह मजाक लगा, लेकिन जल्द ही पुष्टि हुई कि वे 2025 के चिकित्सा (Medicine) क्षेत्र की विजेताओं में शामिल हैं।
ब्रंकॉव और उनकी टीम ने पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस नामक उस जैविक प्रक्रिया की खोज की थी जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को संतुलित रखती है। यह खोज डायबिटीज, लूपस और रूमेटाइड आर्थराइटिस जैसी बीमारियों को समझने में अहम रही है।
जंगल में छुट्टियों के बीच मिली नोबेल की खबर
इसी टीम के सदस्य फ्रेड राम्सडेल उस वक्त येलोस्टोन नेशनल पार्क में छुट्टियां मना रहे थे। उनका फोन एयरप्लेन मोड में था, इसलिए घंटों तक उन्हें खबर नहीं मिली कि वे भी नोबेल विजेता बन चुके हैं।
जब उनकी पत्नी के फोन पर बधाई संदेशों की बाढ़ आई, तभी उन्हें पता चला कि उन्होंने दुनिया का सबसे बड़ा वैज्ञानिक सम्मान जीत लिया है।
कंप्यूटर खोलकर खुद देखा नाम
भौतिकी (Physics) के नोबेल विजेता जॉन मार्टिनिस उस वक्त सो रहे थे जब उनकी पत्नी ने सुबह-सुबह दरवाजा खोला।
उन्होंने सोचा शायद कोई इंटरव्यू लेने आया है, लेकिन जब कंप्यूटर खोला तो नोबेल प्राइज वेबसाइट पर अपना नाम देखा और हैरान रह गए।
मार्टिनिस ने बताया –
“मैंने देखा मेरा नाम मिशेल डेवोरेट और जॉन क्लार्क के साथ लिखा था। यह मेरे लिए एक सपने जैसा पल था।”
इन तीनों को क्वांटम टनलिंग (Quantum Tunneling) पर शोध के लिए यह पुरस्कार मिला, जिसने डिजिटल टेक्नोलॉजी और क्वांटम कंप्यूटिंग की दिशा बदल दी।
‘नोबेल प्राइज’ वाली कॉल समझी स्पैम
हर साल नोबेल कमेटी औपचारिक घोषणा से पहले विजेताओं को कॉल करके सूचना देती है। लेकिन इस बार कई लोगों ने इसे स्पैम कॉल समझकर अनदेखा कर दिया।
रसायन विज्ञान (Chemistry) के विजेता सुसुमु कितागावा ने बताया –
“मैंने फोन कुछ रुखे अंदाज़ में उठाया, यह सोचकर कि शायद फिर कोई टेलीमार्केटिंग कॉल होगी। बाद में जब दोबारा कॉल आई, तब समझ आया कि यह तो नोबेल कमेटी थी।”
दिलचस्प कहानियों से भरा नोबेल 2025
इस बार के नोबेल पुरस्कार सिर्फ शोध और उपलब्धियों की वजह से नहीं, बल्कि विजेताओं तक पहुंचने वाली अनोखी खबरों के लिए भी याद रखे जाएंगे।
कभी दरवाजे की दस्तक, कभी जंगल में संदेश, और कभी एक अनदेखी कॉल –
नोबेल प्राइज 2025 ने दुनिया को फिर दिखाया कि महानता अक्सर सबसे अनपेक्षित क्षणों में दस्तक देती है।
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