बुनियादी सुविधाओं के अभाव का दंश झेल रहा निचलौल डिपो,अस्तित्व खतरे में

डॉ सतीश पांडेय व नीरज मिश्र की रिपोर्ट

निचलौल नगर पंचायत का हाल

देश, प्रदेश में बस डिपो का मिट गया अस्तित्व पहचान का मोहताज हुआ निचलौल

सबसे अधिक आय देने वाला निचलौल डिपो हुआ उपेक्षा का शिकार

डिपो की उपेक्षा देखते रहे जनप्रतिनिधि

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।
निचलौल नगर पंचायत अंतर्गत स्थित रोडवेज बस डिपो का बंद परिसर आज भी अपनी बुनियादी सुविधाओं के अभाव का दंश झेल रहा है। वर्ष 1989 से 2017 तक 28 वर्ष तक निचलौल से संचालित बस डिपो का नाम केवल कागजों में ही सिमट कर रह गया है। परिसर झाड़ियों के रूप में तब्दील हो चुका है। सबसे अधिक आय देने वाला निचलौल डिपो अब अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। वर्ष 1989 का साल निचलौल क्षेत्र के विकास के लिए एक स्वर्णिम साल रहा। इसी साल बंद पड़ी चीनी मिल परिसर को परिवहन निगम द्वारा निचलौल डिपो बनाया गया। यहां से बसें नेपाल बॉर्डर के सोनौली से देश की राजधानी दिल्ली तक चलती रही। डिपो ने अति पिछड़े क्षेत्र निचलौल को देश की राजधानी दिल्ली मेंअलग पहचान दिया। बल्कि इससे क्षेत्र के सैकड़ों बेरोजगार युवाओं को रोजगार भी मुहैया हुआ। कुछ डिपो में तो कुछ बाहर दुकानदारी करके बेरोजगारी से निजात पाए। वर्ष 2007 में यहां की रौनक बढ़ी। कुछ दिनों के बाद यहां के युवाओ के रोजी-रोटी पर किसी की काली नजर पड़ गई और उनकी रोजी-रोटी पर ग्रहण लग गया। अगस्त माह में अधिक बरसात होने से डिपो परिसर में कुछ समय के लिए बरसात का पानी भर गया।अधिकारियों से कह कर कुछ रोडवेज कर्मियों ने अपने निजी स्वार्थ के चक्कर में तीन माह के लिए डिपो का संचालन महराजगंज बस स्टेशन से संचालित करा दिया था लेकिन आज तक यह डिपो महराजगंज से निचलौल पुनः वापस नही आया। आज भी यहा के लोग निचलौल डिपो वापसी के लिए हैरान हैं उन लोगों का कहना है कि आखिर कब तक निचलौल डिपो निचलौल में आएगा ।
बताया जाता है कि निचलौल डिपो का संचालन जिला मुख्यालय से कराने के लिए वर्ष 2008 में तत्कालीन परिवहन मंत्री ने निचलौल के अलावा अलग से महराजगंज व सोनौली डिपो बनाने की घोषणा भी की थी। तब 29 अगस्त 2008 को दोनों का शिलान्यास भी किया गया वर्तमान में सोनौली डिपो है। यदि महराजगंज को भी डिपो बनाया जाए तो जिले
को तीन डिपो मिल सकता था लेकिन निचलौल डिपो का नाम हटाकर महराजगंज कर दिया गया वर्ष 2020 मे यह डिपो महराजगंज के नाम से दर्ज हो गया ऐसे मे नेपाल बार्डर होने के कारण सबसे ज्यादा यात्री निचलौल ठूठीबारी क्षेत्र से हजारो की संख्या मे लोगों का आना जाना रहता है लेकिन विकास के एक स्तम्भ को निचलौल से छिन लिया गया जो जन प्रतिनिधियो के मौन होने का परिणाम है
बसों से निचलौल डिपो का नाम हटाने पर विभिन्न संगठन व युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। डिपो को हटाने से क्षेत्र के लोगों में आज भी आक्रोश है सवाल इस बात को लेकर है? कि जब निचलौल के अलावा अलग से महराजगंज डिपो बनाने की सहमति हुई थी। तो एक डिपो को खत्म क्यों किया जा रहा है? हालांकि आज भी विभाग के पास ऐसा कोई आदेश उपलब्ध नहीं है कि निचलौल डिपो को महराजगंज में बदल दिया जाए। फिर भी आनन-फानन में बसों पर लिखित डिपो का नाम किस आधार पर बदल दिया गया, यह भी एक सवाल है? राष्ट्र की परम्परा टीम से बस डिपो वह स्टेशन को लेकर स्थानीय लोगों का क्या है कहना —— निचलौल तहसील के इनकम टैक्स व जीएसटी एडवोकेट अंकित त्रिपाठी ने कहा कि निचलौल डिपो की वजह से देश व प्रदेश में एक अलग पहचान थी लेकिन डिपो हटने के बाद ही यह वजूद समाप्त हो गया तथा जनप्रतिनिधियों के उपेक्षा का शिकार भी हुआ जो आज भी खंडहर के रूप में अपना अस्तित्व दिख रहा है। भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष भरत चौधरी ने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कारण यह डिपो बंद है। जो बस डिपो बस स्टेशन की हालत देख विकास पर छाए बादल की तरह दिख रहा है जो आज भी जस का तस बना हुआ है। स्थानीय निवासी प्रभु नाथ कुमार ने कहा कि बस डिपो समाप्त होते ही बस स्टेशन सहित बस डिपो की हालत कबाड़ की तरह हो गया है और निचलौल कस्बा की पहचान एक ही जगह सिमट कर रह गया है। यही कारण है कि बस स्टेशन की जगह अब बस रोड पर खड़ा हो रहा है ।

rkpnews@desk

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