वक्त निर्देश शिरोधार्य कर रहा हूँ
——XXXXX——
कविता लिखना अब शौक़ बन गया है,
रचना करने का जुनून पैदा हो गया है,
अपने मन कि बात ही तो कह रहा हूँ,
किसी से किसी का क्या कुछ ले रहा हूँ।
इन रचनाओं से न कुछ लाभ ले रहा हूँ,
और न ही अपनी कोई जेब भर रहा हूँ,
जो कर रहा हूँ सबके लिए कर रहा हूँ,
जो लिखता हूँ, सबके लिये लिखता हूँ।
जो ख़ुश होते हैं पढ़ कर मेरी रचनायें
उनका कृतज्ञ हो आभार कर रहा हूँ,
जो नही कहते कुछ भी, बस हृदय में
रखते, उनका भी आभार कह रहा हूँ।
अपनी वाणी तो उस धागे जैसी है,
जो सुई में जाकर मोती पिरोती है,
छिद्र करना सुई का काम होता है,
पुष्प पिरो माला गूँथना पड़ता है।
वक्त बेवक्त लिखते रहना तो वक्त
की अनुगूँज पर ही आधारित होता है,
किसी के पास पढ़ने का वक्त नहीं होता,
किसी का लिखकर भी वक्त नहीं कटता।
वक्त किसी को दिखाई कभी नहीं देता,
पर वक्त सभी को सबकुछ दिखा देता है,
रचना को अच्छी तो सब कह देते हैं,
उनका अपनापन वक्त सिखा देता है।
आदित्य रचनाओं से भला हो सबका,
समाज व देश से दिशा निर्देश ले रहा हूँ,
कामयाबी मिले न मिले इन रचनाओं से,
वक्त का निर्देश शिरोधार्य कर रहा हूँ।
कर्नल आदि शंकर मिश्र, आदित्य
लखनऊ
बढ़नी-नकहा पैसेंजर ट्रेन से हुआ हादसा, पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव महराजगंज (राष्ट्र की…
संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। श्रावण मास के प्रथम सोमवार को तामेश्वरनाथ धाम शिव मंदिर में…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने अपने दिव्यांग पूर्व छात्र सुनील कुमार…
खलीलाबाद में डीएम आलोक कुमार ने की जनसुनवाई, अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के…
पडरौना(राष्ट्र की परम्परा)l जिला जज और अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कुशीनगर संजीव कुमार त्यागी…
परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ ने शिक्षा विभाग को सौंपा ज्ञापन पटना(राष्ट्र की परम्परा)l बिहार में शिक्षकों…