गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026’ को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में विवाद गहराता जा रहा है। यह विनियमन 15 जनवरी 2026 से देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू कर दिया गया है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव को रोकना बताया गया है, लेकिन इसे लेकर अब तीखा विरोध सामने आया है।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) देवेंद्र प्रताप सिंह ने UGC अध्यक्ष/सचिव को पत्र लिखकर इस विनियमन को सामाजिक समरसता के लिए घातक बताया है और इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
सामाजिक संतुलन बिगाड़ने का आरोप
अपने पत्र में एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि यूजीसी 2026 का यह निर्णय विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। उनका मानना है कि इस तरह के नियमों से समाज में जाति आधारित टकराव बढ़ने की आशंका है, जिसका सीधा असर शैक्षणिक माहौल और पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ेगा।
उन्होंने आशंका जताई कि यह विनियमन भविष्य में दुरुपयोग का माध्यम बन सकता है और इससे सामान्य वर्ग के छात्रों के उत्पीड़न की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
भेदभाव के खिलाफ हैं, लेकिन संतुलन जरूरी
एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी छात्र के साथ भेदभाव के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय रोकना बेहद जरूरी है, लेकिन नियम बनाते समय सभी वर्गों के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
उनका कहना है कि यूजीसी द्वारा तैयार किया गया यह विनियमन सामान्य वर्ग के छात्रों में असुरक्षा की भावना पैदा कर सकता है, जो समता और समानता के मूल उद्देश्य के विपरीत है।
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पहले से मौजूद हैं कानूनी प्रावधान
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय न्याय संहिता में पहले से ही भेदभाव, उत्पीड़न और उत्पीड़क व्यवहार जैसे मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। ऐसे में उच्च शिक्षण संस्थानों में अलग से समता समिति गठित करने की आवश्यकता पर सवाल उठाया गया है।
एमएलसी सिंह ने कहा कि यदि समिति का गठन किया भी जाता है, तो उसका उद्देश्य भर्तियों और पदोन्नति में आरक्षित वर्ग के चयन को सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि ऐसा ढांचा बनाना जिससे नए विवाद पैदा हों।
उच्च शिक्षा को शोध का केंद्र बनाने की मांग
यूजीसी 2026 विनियमन के विरोध के साथ-साथ देवेंद्र प्रताप सिंह ने उच्च शिक्षा को मजबूत और विश्वस्तरीय बनाने के लिए कई अहम सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को केवल डिग्री देने का माध्यम न बनाकर शोध और नवाचार का केंद्र बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने अनुसंधान में निवेश बढ़ाने, विश्वस्तरीय रिसर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और साझा प्रयोगशालाओं व शोध परिसरों की स्थापना पर जोर दिया।
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रिसर्च इकोसिस्टम मजबूत करने पर जोर
एमएलसी सिंह ने सुझाव दिया कि सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से उत्कृष्ट केंद्र, साझा प्रयोगशालाएं और बड़े शोध परिसर विकसित किए जाएं। इसके साथ ही शोध संस्थानों में प्रतिस्पर्धी वेतन, अकादमिक स्वायत्तता और वैश्विक प्रतिभाओं को भारत वापस लाने की नीति पर काम किया जाना चाहिए।
उन्होंने बड़े विश्वविद्यालयों, बड़े शोध समूहों और टीम आधारित शोध संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़े अनुसंधान, पेटेंट, स्टार्टअप और सामाजिक प्रभाव वाले शोध कार्यों के लिए अधिक कोष आवंटन की मांग की।
आत्मनिर्भर राष्ट्र के लिए मजबूत शिक्षा तंत्र
एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अंतिम लक्ष्य ऐसे उत्कृष्ट केंद्र विकसित करना होना चाहिए, जो ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और शोध के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर मजबूत बना सकें।
उनका कहना है कि उच्च शिक्षा नीति का उद्देश्य विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना होना चाहिए, जहां सभी वर्गों के छात्र बिना भय और भेदभाव के शिक्षा ग्रहण कर सकें।
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