चाय पर जुटेगा विपक्ष! ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आंदोलन तेज करने की तैयारी, INDIA गठबंधन बनाएगा अगली रणनीति
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। देश की राजनीति में मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ का मुद्दा एक बार फिर गरमाता नजर आ रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के नेताओं, विपक्षी सांसदों, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को अपने आवास पर चाय पर आमंत्रित किया है। इस बैठक को विपक्ष की आगे की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। संभावना है कि बैठक में कथित वोट चोरी के खिलाफ संयुक्त विरोध-प्रदर्शनों को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए चल रहे जनांदोलन में INDIA गठबंधन के सभी घटक दल एकजुट हैं और यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि चाय पर मुलाकात के बाद विपक्षी नेता एक साथ मीडिया के सामने अपनी बात रखेंगे। राहुल गांधी की ओर से भेजे गए निमंत्रण के मुताबिक, बैठक मंगलवार शाम चार बजे नई दिल्ली स्थित उनके आवास, 5 सुनहरी बाग रोड पर आयोजित की गई है। इससे पहले विपक्षी नेताओं ने लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर मार्च निकाला था। इसके बाद इस मामले में उच्चतम न्यायालय में याचिका भी दाखिल की गई। विपक्षी दलों की रणनीति अब इस मुद्दे को व्यापक राजनीतिक अभियान का रूप देने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। बैठक में विभिन्न दलों के नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना के बीच सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि विपक्ष आगे के आंदोलन के लिए क्या साझा कार्यक्रम घोषित करता है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल पिछले कुछ समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची की पारदर्शिता, उसकी शुचिता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है। विपक्षी नेता मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। सोमवार को विपक्षी नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए उच्चतम न्यायालय की ओर मार्च किया था। इस मामले में दाखिल याचिका के जरिए भी विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को न्यायिक स्तर पर उठाया है। हालांकि, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और ‘वोट चोरी’ से संबंधित आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है। राहुल गांधी के आवास पर होने वाली इस बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें राजनीतिक दलों के साथ छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी प्रस्तावित है। इससे विपक्ष अपने अभियान को केवल संसद और राजनीतिक मंचों तक सीमित रखने के बजाय व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश कर सकता है। अब सबकी नजरें बैठक के बाद होने वाली संयुक्त प्रेस वार्ता पर टिकी हैं। विपक्षी नेता चुनाव आयोग के मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाते हैं, आंदोलन का अगला चरण क्या होगा और क्या सभी घटक दल किसी साझा कार्यक्रम पर सहमत होंगे—इन सवालों के जवाब बैठक के बाद सामने आ सकते हैं। फिलहाल राहुल गांधी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर शुरू किया गया उनका राजनीतिक अभियान जारी रहेगा।
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