दिल्ली में CJP प्रदर्शन से पहले बड़ी कार्रवाई, नेता-पत्रकार हिरासत में; डिटेंशन सेंटर की व्यवस्था पर सवाल

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर शनिवार को राजधानी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले पुलिस ने कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, संगठन से जुड़े आशुतोष रांका और सौरव दास के अलावा प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकार भी शामिल बताए गए हैं। अलग-अलग स्थानों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद राजनीतिक दलों ने विरोध जताया, जबकि हिरासत में रखे गए लोगों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं।


CJP ने आरोप लगाया कि उसके नेताओं को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए हवाई अड्डे पर ही हिरासत में ले लिया गया। संगठन ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को दबाने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया। संगठन ने घोषणा की कि इन नेताओं की हिरासत के बीच संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। CJP के अनुसार, संभावित गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए अभिजीत दीपके ने पिछली रात ही एक वीडियो रिकॉर्ड कर लिया था।
प्रदर्शन की कवरेज करने पहुंचे पत्रकार को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम ने पत्रकारों की स्वतंत्रता और विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान मीडिया कर्मियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, हिरासत में लिए गए सभी लोगों की कुल संख्या और उनकी रिहाई को लेकर अलग-अलग स्थानों से मिल रही जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने CJP नेताओं की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक अधिकारों पर दबाव बढ़ रहा है और मौजूदा स्थिति आपातकाल से भी बदतर होती जा रही है। केजरीवाल ने कथित वोट चोरी का मुद्दा उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का असर दूसरे राजनीतिक संगठनों की गतिविधियों पर भी दिखाई दिया। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी के कई नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। वहीं, सीईसी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, आइसा अध्यक्ष नेहा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अधिवक्ता प्रशांत भूषण को आईएनए बाजार के पास हिरासत में लिए जाने की जानकारी मिली। इन घटनाओं के बीच राजधानी के कई इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई और बैरिकेडिंग के जरिए प्रदर्शनकारियों की आवाजाही नियंत्रित की गई।
चंडीगढ़ में भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मुद्दे को लेकर किया जा रहा था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को हटाया। इस दौरान एक पत्रकार को भी हिरासत में लिए जाने की सूचना सामने आई। दिल्ली और चंडीगढ़ में हुई कार्रवाइयों के बाद चुनाव प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और विरोध के अधिकार को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
राजधानी में प्रदर्शन के बीच आकाशवाणी भवन के पास पुलिसकर्मियों पर पथराव की घटना भी सामने आई। इस घटना में दो पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी दी गई। सब-इंस्पेक्टर बजरंग जाधव ने भी बताया कि उपद्रव कर रहे लोगों को पकड़ने के प्रयास के दौरान उन्हें धक्का लगा, जिससे वह घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी और कई लोगों को हिरासत में लिया। हालांकि, पथराव की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों के संबंध में आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं।
हिरासत में लिए गए लोगों को राजीव गांधी स्टेडियम में बनाए गए केंद्र में रखे जाने के बाद वहां की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठे। पत्रकार प्रशांत के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, केंद्र में पीने के पानी, भोजन और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर परेशानियां थीं। बताया गया कि पानी का टैंकर मौजूद था, लेकिन उससे पानी लेने की व्यवस्था सुविधाजनक नहीं थी। भोजन के लिए कुछ रेहड़ी वालों पर निर्भर रहना पड़ रहा था। इंटरनेट सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण डिजिटल भुगतान में भी परेशानी होने की बात कही गई।
डिटेंशन सेंटर में शौचालयों की साफ-सफाई और महिलाओं तथा नाबालिगों को रखे जाने को लेकर भी चिंता जताई गई। कुछ बच्चों के हवाले से दावा किया गया कि वे भंडारे में भोजन करने जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें पकड़कर केंद्र पहुंचा दिया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हिरासत में रखे गए लोगों को कब छोड़ा जाएगा, इस संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने की बात भी सामने आई। यदि ये शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो संबंधित अधिकारियों से हिरासत में रखे गए लोगों के लिए स्वच्छता, पेयजल, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने की जवाबदेही तय करने की मांग उठ सकती है।
इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को उनकी दादी के निधन की सूचना दिए जाने की बात पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आई। बताया गया कि पुलिस ने उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वापस जाने का विकल्प दिए जाने की जानकारी दी। इस घटनाक्रम ने हिरासत में रखे गए व्यक्ति के पारिवारिक और मानवीय अधिकारों से जुड़े सवाल भी खड़े किए हैं।
CJP ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया कि पुलिस गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब परिसर में दाखिल हुई और वहां से लोगों को पकड़कर हिरासत में ले गई। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। धार्मिक स्थल के परिसर में पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
उधर, दिल्ली के किदवई नगर में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को वापस लेने की मांग करते हुए नारेबाजी की। जंतर-मंतर के आसपास कड़ी सुरक्षा और बैरिकेडिंग के बीच दूसरे इलाकों में भी विरोध जारी रहा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया।
पूरे घटनाक्रम ने राजधानी में कानून-व्यवस्था, राजनीतिक विरोध के अधिकार, पत्रकारों की स्वतंत्रता और हिरासत केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर पुलिस की ओर से सुरक्षा बनाए रखने और कानून-व्यवस्था नियंत्रित करने की कार्रवाई की जा रही है, तो दूसरी ओर विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी हिरासत को लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाने वाला कदम बता रहे हैं। हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या, उनकी स्थिति और अलग-अलग स्थानों पर हुई कार्रवाइयों के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

Editor CP pandey

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