मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों ने राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ ला दिया है। करीब तीन दशक तक बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर शासन करने वाली अविभाजित शिवसेना का दबदबा समाप्त हो गया है। शुक्रवार को घोषित नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बीएमसी चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिसने राज्य के शहरी राजनीति संतुलन को पूरी तरह बदल दिया।
पूरे महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों की कुल 2,869 सीटों के नतीजे सामने आए हैं। इनमें भाजपा ने रिकॉर्ड 1,425 सीटों पर जीत दर्ज की। शिवसेना को 399, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को 167 सीटें मिलीं। 227 सदस्यीय बीएमसी में भाजपा ने 89 सीटें, जबकि शिवसेना ने 29 सीटें जीतकर स्पष्ट बढ़त बनाई। यह परिणाम मुंबई की राजनीति में एक युगांतकारी परिवर्तन माना जा रहा है।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दक्षिण मुंबई में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन मुंबई सहित 29 में से 25 नगर निगमों में सत्ता बनाने जा रहा है। नगर निकाय चुनाव के लिए 15 जनवरी को मतदान हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मुंबई की जनता का आभार जताते हुए कहा कि मुंबई देश का गौरव और सपनों का शहर है तथा केंद्र सरकार शहरवासियों को सुशासन और बेहतर जीवन सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने हार के लिए एकनाथ शिंदे को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने शिंदे पर पार्टी से विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि 2022 में बगावत न होती तो आज मुंबई में भाजपा का महापौर नहीं होता।
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अन्य प्रमुख नगर निगमों में भी भाजपा का दबदबा दिखा। नागपुर में भाजपा ने 151 में से 102 सीटें जीतीं। पुणे में भाजपा को 96 सीटें, पिंपरी-चिंचवड में 84 सीटें मिलीं। हालांकि लातूर नगर निगम में कांग्रेस ने 70 में से 43 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
इस चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने भी चौंकाने वाला प्रदर्शन किया और राज्यभर में 114 सीटें जीतीं। औसतन 54.77% मतदान दर्ज किया गया, जबकि 19 निर्दलीय उम्मीदवार भी विजयी रहे।
यह परिणाम न केवल शहरी मतदाताओं के बदलते रुझान को दर्शाते हैं, बल्कि 2029 की राजनीति की दिशा भी तय करते नजर आ रहे हैं।
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