महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। महराजगंज जनपद के सिसवा बाजार नगर पालिका परिषद क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। ब्लाक रोड रायपुर स्थित नगर के प्रमुख जल निकासी नाले की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। यह नाला कस्बे के पूर्वी हिस्से में स्थित है और पूरे नगर से बरसात का पानी बाहर निकालने का एकमात्र प्रमुख स्रोत माना जाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्व अभिलेखों में इस नाले की चौड़ाई 60 कड़ी से लेकर 125 कड़ी तक दर्ज है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। वर्तमान समय में नाला सिमटकर महज 8 से 10 कड़ी चौड़ा रह गया है। आरोप है कि स्थानीय लोगों और कुछ राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से नाले की जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा कर लिया गया, जिससे इसकी चौड़ाई लगातार कम होती चली गई।
नाले की चौड़ाई कम होने का सीधा असर नगर की जल निकासी व्यवस्था पर पड़ रहा है। बीते वर्ष हुई भारी बारिश के दौरान यह समस्या खुलकर सामने आई थी। जल निकासी बाधित होने के कारण कस्बे के पूर्वी हिस्से में व्यापक जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। कई इलाकों में पानी लंबे समय तक जमा रहा, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
जलभराव का सबसे अधिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ा। खेतों में भरा पानी समय पर नहीं निकल पाने के कारण फसलें बर्बाद हो गईं। इसके अलावा, आवासीय इलाकों में पानी भरने से लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर नाले की वास्तविक चौड़ाई बनी रहती, तो जलभराव की स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
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स्थानीय नागरिकों और सामाजिक लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नाले का तत्काल सीमांकन कराया जाए और अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो आने वाले मानसून में हालात और भयावह हो सकते हैं। बारिश का पानी निकलने का रास्ता और संकरा हुआ तो पूरे कस्बे में जलभराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब राजस्व नक्शों में नाले की चौड़ाई स्पष्ट रूप से दर्ज है, तो अब तक सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभागों की उदासीनता और मिलीभगत के कारण ही नाले की जमीन पर कब्जा संभव हो पाया है।
फिलहाल इस पूरे मामले पर संबंधित विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। न तो किसी तरह की जांच की बात सामने आई है और न ही सीमांकन की कोई ठोस पहल की गई है। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या नाले की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कर जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा, या फिर यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगा। आने वाला मानसून इस सवाल का जवाब देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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