महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। फरवरी का महीना इस बार आम लोगों के लिए महंगाई का नया झटका लेकर आया है। हरी मिर्च, जो हर रसोई की जरूरत मानी जाती है, अचानक इतनी महंगी हो गई कि घरेलू बजट का संतुलन बिगड़ गया। बीते सप्ताह तक 20 रुपये पाव बिकने वाली मिर्च अब 35 रुपये पाव यानी करीब 140 रुपये किलो तक पहुंच गई है।
मंडियों में चर्चा का विषय बने दाम
सब्जी मंडियों में इन दिनों मिर्च के बढ़ते भाव चर्चा का विषय हैं। फुटकर बाजार में ग्राहक पहले दाम पूछ रहे हैं और फिर जरूरत के हिसाब से कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।
दुकानदारों का कहना है कि थोक मंडी से ही माल महंगा आ रहा है, इसलिए खुदरा दाम बढ़ाना मजबूरी है।
शीतलहर और कम आवक बनी वजह
जिले में हरी मिर्च की आपूर्ति मुख्यतः Rampur, Barabanki और Varanasi जैसे जिलों से होती है। हाल में प्रदेश के कई हिस्सों में पड़ी शीतलहर से तैयार फसल को नुकसान पहुंचा, जिससे मंडियों में आवक कम हो गई।
कारोबारियों के मुताबिक आपूर्ति में कमी ही कीमतों में तेजी का मुख्य कारण है।
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शादी-विवाह के सीजन से बढ़ी मांग
इन दिनों लग्न का सीजन चल रहा है। कैटरिंग और बड़े आयोजनों में सब्जियों की खपत कई गुना बढ़ जाती है। कैटरिंग कारोबारियों का कहना है कि मांग अचानक बढ़ने और आवक घटने से बाजार में असंतुलन पैदा हुआ, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा।
सब्जी विक्रेता मोहनलाल के अनुसार, पांच फरवरी के बाद से थोक दरों में तेजी आई और उसके बाद फुटकर बाजार में भी दाम तेजी से ऊपर चढ़ गए।
रसोई का बिगड़ा गणित
हरी मिर्च भले ही कम मात्रा में इस्तेमाल होती हो, लेकिन हर सब्जी और सलाद का स्वाद इसी से निखरता है। गृहिणियों का कहना है कि पहले से ही आलू, टमाटर और अन्य सब्जियों के दाम ऊंचे हैं, ऐसे में मिर्च की महंगाई ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
व्यापारियों का अनुमान है कि यदि मौसम अनुकूल रहा और बाहरी जिलों से आवक सामान्य हुई, तो कुछ दिनों में कीमतों में नरमी आ सकती है। फिलहाल, मिर्च का तीखापन बाजार से लेकर रसोई तक साफ महसूस किया जा रहा है।
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