देवरिया में यूजीसी प्रावधानों पर महापंचायत, सरकार के खिलाफ तीखे तेवर

समान संघर्ष समिति के मंच से नीतियों पर सवाल; अलंकार अग्निहोत्री ने 2029 में चुनावी मैदान में उतरने की जताई मंशा

शिक्षा नीति और सामाजिक संतुलन पर महापंचायत की दो टूक

गौरव कुशवाहा की कलम से

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)यूजीसी एक्ट के प्रस्तावित नए प्रावधानों को लेकर देवरिया महापंचायत यूजीसी प्रावधान चर्चा के केंद्र में आ गई है। सोमवार को जिले में स्वर्ण समाज के लोगों ने समान संघर्ष समिति के बैनर तले भव्य महापंचायत आयोजित कर केंद्र सरकार की शिक्षा और सामाजिक नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। वक्ताओं ने कहा कि हालिया नीतिगत फैसलों से समाज के एक बड़े वर्ग में असंतोष बढ़ा है और सरकार को संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
महापंचायत में शामिल वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यूजीसी प्रावधान विरोध देवरिया केवल शिक्षा से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर सामाजिक संतुलन, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और अकादमिक स्वतंत्रता पर भी पड़ता है। इसी वजह से यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।

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अलंकार अग्निहोत्री का तीखा बयान, 2029 चुनाव की घोषणा
मुख्य अतिथि और पूर्व पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अपने संबोधन में यूजीसी से जुड़े बदलावों, एससी–एसटी एक्ट और दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े एक प्रकरण का उल्लेख करते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नीति-निर्माण में सभी वर्गों की भागीदारी और पारदर्शी संवाद जरूरी है।
अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में “वेस्ट इंडिया कंपनी जैसी सरकार” चल रही है, जिससे जनाधार कमजोर हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वर्ष 2029 के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी मैदान में उतरते हैं तो वे उनके खिलाफ चुनाव लड़ने पर विचार करेंगे। इस बयान को सभा में मौजूद लोगों का समर्थन मिला और इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताया गया।

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शिक्षा नीति, सामाजिक संतुलन और संवाद की मांग
महापंचायत में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि देवरिया महापंचायत यूजीसी प्रावधान का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि रचनात्मक संवाद है। उनका कहना था कि विश्वविद्यालयों में नियुक्ति, प्रमोशन, रिसर्च फंडिंग और अकादमिक ढांचे से जुड़े बदलावों पर सभी हितधारकों—शिक्षक, छात्र, अभिभावक और समाज—से राय ली जानी चाहिए।
वक्ताओं के अनुसार, यूजीसी प्रावधान विरोध देवरिया इसलिए भी जरूरी हो गया है क्योंकि शिक्षा नीति का सीधा असर ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के छात्रों पर पड़ता है। यदि नीतियां जमीनी हकीकत से कटकर बनेंगी तो असमानता और बढ़ेगी।
आयोजन, नेतृत्व और बड़ी भागीदारी
कार्यक्रम की अध्यक्षता वयोवृद्ध के.पी. त्रिपाठी ने की, जबकि संचालन रवि मिश्रा ‘छोटे’ ने किया। सवर्ण आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वेश पाण्डेय सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधि, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे।
सभा में यह भी कहा गया कि देवरिया महापंचायत यूजीसी प्रावधान आगे भी चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी और आवश्यकता पड़ी तो राज्य स्तर पर आंदोलन तेज किया जाएगा। आयोजकों ने यह स्पष्ट किया कि आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से चलेगा।

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सरकार से मांगें और आगे की रणनीति
समापन के दौरान आयोजकों ने केंद्र सरकार से मांग की कि:
विवादित यूजीसी प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए।
नीति बनाने से पहले व्यापक सामाजिक संवाद हो।
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और अकादमिक स्वतंत्रता सुरक्षित रहे।
वक्ताओं ने कहा कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ तो यूजीसी प्रावधान विरोध देवरिया राष्ट्रीय स्तर पर भी गूंज सकता है।

Editor CP pandey

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