जिस गुण से आजीविका का निर्वाह
होता हो और जिसकी सभी एक स्वर
से प्रशंसा करते हों, स्वीकार करते हों,
वह निश्चित ही एक सद्गुण ही होगा।
उस गुण को हमें अपने स्वयं के
व सभी के विकास के लिये हर
समय बचाना भी और बढ़ावा भी
देना ही सर्वथा उचित होता है।
अगर हम कोई ऐसी वस्तु या गुण
प्राप्त करना चाहते हैं जो हमारे पास
अभी तक नहीं है तो हमें खुद उसके
लायक़ कार्य भी करना होता है।
जीवन के छोटे छोटे कदम, छोटे
छोटे विचार व छोटे छोटे कार्य जो
उचित दिशा में लिये या किये जाते हैं
वह बड़ा प्रतिफल देने वाले होते हैं।
हम न हर एक को ख़ुश रख सकते हैं
और न ही जीवन का यह उद्देश्य ही है
पर यह आवश्यक है और यह ध्येय
भी हो कि किसी को दुःखी न करें।
यह निश्चित है कि जब पूरा साहस
किया जाता है तब ताक़त बढ़ती है,
एक साथ ख़ुशी होने से परिवार,
एवं समाज की एकता बढ़ती है।
प्रेम आपस में बाँटने से ही बढ़ता है
और रिश्ते दुरुस्त रहते हैं, जब एक
दूसरे की हृदय से परवाह की जाती है
आदित्य जीवन की गति ही न्यारी है।
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