धूमधाम से मनाया गया भगवान का छठिहार

नृत्य ही सृष्टि का आधार है- गुरु श्री वेद

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) स्थानीय श्री मुरली मनोहर मंदिर प्रेम वृंदावन सलेमपुर में चल रहे 16 दिवसीय श्री राधाकृष्ण जन्म महोत्सव के छठ्ठे दिन मंगलवार की शाम भगवान श्री कृष्ण के छठिहार का आयोजन किया गया जिसमें भारी सांख्य में श्रद्धालू उपस्थित रहे|उक्त अवसर पे राधाकृष्ण एवं गोपी-ग्वाल के भेष में सुसज्जित होकर चौदह वर्ष से कम आयु के बालक-बालिकाओं ने नृत्य किया एवं राधाकृष्ण की मधुर लीलाओं के अनेक झांकियां प्रस्तुत की, जिसे देख भारी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर हो गयें। विद्यासागर दुबे, मोनू पांडे, किशन पांडे, दीनदयाल पाठक, मयंक मिश्रा, राजन मिश्रा, अविनाश तिवारी, अंकुर उपाध्याय, दुर्गेश गुप्ता, राजू श्रीवास्तव आदि गायक भक्तों ने अपने भजनों से सब को भाव विभोर कर दिया।
उक्त अवसर पर नृत्य की महिमा बताते हुए गुरुश्री वेद प्रकाश ने कहा कि संगीत सृष्टि का आधार है। सृष्टि की उत्पत्ति नाद अर्थात संगीत से ही मानी जाती है। मुख्य रूप से संगीत के तीन पक्ष होते हैं गायन, वादन तथा नर्तन किंतु तीनों पक्षों में नृत्य जीव को सर्वाधिक भगवत भाव में डूबाता है। वैसे तो मन की एकाग्रता गायन वादन एवं नर्तन तीनों में आवश्यक है, किंतु नृत्य में सर्वाधिक अधिक आवश्यक है। यूं कहे की संगीत में साध्य तो नृत्य ही है, गायन वादन तो उसके सहयोगी हैं। ठीक से देखें तो पूरी सृष्टि नृत्य कर रही है। ये धरती, आसमान, सूरज, चांद, सितारे, यहां तक कि हमारा जीवन चक्र भी पल प्रतिपल नृत्य कर रहा है, क्योंकि नृत्य ही आनंद का आधार है। तभी तो भगवान को अपना यह नटनागर वनमाली रूप सर्वाधिक प्रिय है।
उक्त अवसर पर अनन्या, पिंकी, रानी, प्रिया, वैष्णवी, रिमझिम, ज्योति, पूजा, रिया, राधा, आरती, नैना, कोमल, शीतल, नेहा, सिद्धि, आशीष, प्रकाश, आदित्य, गोलू, चंदन, आदि ने अपनी अपनी प्रस्तुति दिया।
उक्त अवसर पर शंभू दयाल, रामरतन गुप्त, राधारंग, सुधाकर मिश्र, रामविलास तिवारी, हरीनारायण तिवारी, भोले दुबे, मुक्तिनाथ उपाध्याय, ओंकार नाथ गुप्त, मनोज कुमार, संजय गुप्त, चुन्नू श्रीवास्तव, नितिन तिवारी, अशोक पांडे, अशोक गुप्ता, दुर्गेश गुप्ता, विष्णु वर्मा, रतन रौनियार, हेमंत कुमार, राजा वर्मा, चंदन वरनवाल, पर्वती देवी, उमा देवी, लक्ष्मी देवी, कुंती चौरसिया, किरण जयसवाल, राधिका देवी, शैल देवी, अंगूरी देवी, गायत्री देवी, आदि भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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