12 टुकड़ों में बंटने जा रहा पाकिस्तान? बड़ा धमाका, मंत्री का ऐलान… एक्सपर्ट बोले– “ये देश को तोड़ देगा!”

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पाकिस्तान एक बार फिर टूटने की कगार पर खड़ा दिख रहा है। संघीय मंत्री अब्दुल अलीम खान ने दावा किया है कि देश के चार बड़े प्रांत—पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा—को तीन-तीन हिस्सों में बांटकर कुल 12 नए प्रांत बनाए जाएंगे। सरकार कह रही है कि इससे शासन आसान होगा, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम पाकिस्तान को और अराजकता और गृहयुद्ध की ओर धकेल सकता है।

1971 के विभाजन जैसी आहट?

1971 में बांग्लादेश बनने के बाद यह पहला मौका है जब पाकिस्तान में इतने बड़े पैमाने पर विभाजन की बात खुलकर सामने आई है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि यह निर्णय पाकिस्तान की एकता पर “सबसे बड़ा वार” साबित हो सकता है।

सरकार का दावा—छोटे प्रांत = बेहतर प्रशासन

जियो टीवी और इंडिया टूडे के अनुसार, पाकिस्तान सरकार का कहना है:

• बड़े प्रांतों में सत्ता जनता से दूर है

• छोटे प्रांत बनेंगे तो प्रशासन तेजी से काम करेगा

• भारत और बांग्लादेश के मॉडल का हवाला

लेकिन ये दावा जमीन पर सच नहीं लगता—क्योंकि पाकिस्तान पहले से कई आंतरिक संकट झेल रहा है।

सबसे बड़ा खतरा: बलूचिस्तान और KP पहले से जल रहे

• बलूचिस्तान में अलगाववाद चरम पर

• तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) फिर सक्रिय

• बलूच युवाओं के गायब होने और लाशें मिलने की घटनाएँ

• जातीय और भाषाई तनाव पहले से चरम पर

विशेषज्ञों के अनुसार, नए प्रांत बनते ही पाकिस्तान में नए खूनी संघर्ष, और भी ज़्यादा विद्रोह और अराजकता पैदा हो सकती है।

सिंध का सीधा इनकार – “छुआ तो सड़कों पर उतरेंगे”

सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह पहले ही चेतावनी दे चुके हैं:

“सिंध को बांटने की कोशिश की तो लाखों लोग सड़कों पर होंगे।”

PPP और सिंधी राष्ट्रवादी पार्टियों ने इसे “सिंधी पहचान पर हमला” बताया है।
केवल MQM ही नए प्रांतों के पक्ष में है ताकि उसे कराची-हैदराबाद को अलग प्रांत मिल सके।

28वां संविधान संशोधन? क्या किरचे होंगी 12?

शहबाज शरीफ सरकार इस प्रस्ताव को तेज़ी से आगे बढ़ा रही है। चर्चा है कि इसे लागू करने के लिए 28वां संविधान संशोधन लाया जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल—

क्या पाकिस्तान 2025–26 में खुद ही अपने 12 टुकड़े कर लेने वाला है?

अगर नए प्रांतों के बीच संघर्ष शुरू हुआ, तो पाकिस्तान के लिए यह सबसे बड़ा संकट साबित हो सकता है।

Karan Pandey

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