विश्वविद्यालय वित्त समिति की बैठक में लिए गए अहम निर्णय, शैक्षणिक ढांचे को मिलेगी मजबूती

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की वित्त समिति की बैठक कुलपति पूनम टंडन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा के बाद निर्णय लिए गए। स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के लिए नए शैक्षणिक पदों के सृजन, विकास समिति के लगभग नौ करोड़ रुपये के प्रस्तावों के अनुमोदन, एम.फार्मा और एम.टेक पाठ्यक्रमों की फीस संरचना तय करने तथा स्ववित्तपोषित पीएचडी पाठ्यक्रमों की फीस को लेकर समिति ने अपनी सहमति प्रदान की।
बैठक में सहायक आचार्य (संविदा) के 28 नए पदों और सहयुक्त आचार्य (संविदा) के चार पदों के सृजन को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य (संविदा) की कुल संख्या 175, सहयुक्त आचार्य (संविदा) की संख्या 21 और आचार्य अथवा पब्लिक निदेशक के तीन पद हो गए हैं। यह निर्णय स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में शिक्षण व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वित्त समिति ने कृषि इंजीनियरिंग, फार्मेसी और होटल मैनेजमेंट विभागों में कार्यरत विषय विशेषज्ञों के मानदेय में वृद्धि को भी स्वीकृति दी। अब विषय विशेषज्ञों को प्रति व्याख्यान 600 रुपये के स्थान पर 750 रुपये का भुगतान किया जाएगा, जबकि मासिक अधिकतम मानदेय 31 हजार रुपये से बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया गया है। इस कदम से अनुभवी और योग्य विशेषज्ञों को विश्वविद्यालय से जोड़ने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
बैठक में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर (संविदा) के वेतन में भी वृद्धि का निर्णय लिया गया। इसके तहत सभी संविदा असिस्टेंट प्रोफेसरों को तीन प्रतिशत वेतन वृद्धि दी जाएगी, जो एक जुलाई 2026 से प्रभावी होगी। वहीं, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि तीन वर्ष से अधिक हो चुकी है, उन्हें छह प्रतिशत वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा।
इसके अलावा वित्त समिति ने एम.फार्मा और एम.टेक जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों की फीस संरचना तथा स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में शुरू होने वाले पीएचडी प्रैक्टिकल और नॉन-प्रैक्टिकल विषयों की फीस को भी मंजूरी प्रदान कर दी। साथ ही विश्वविद्यालय की तकनीकी आवश्यकताओं को देखते हुए जूनियर इंजीनियर (सिविल एवं इलेक्ट्रिकल) के चार पदों और एक प्लेसमेंट ऑफिसर के पद को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भरने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई।
बैठक के समापन पर कुलपति पूनम टंडन ने कहा कि वित्त समिति द्वारा लिए गए निर्णय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढांचे को सशक्त बनाने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्र हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

rkpNavneet Mishra

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