क्या वह पीढ़ी ही अनपढ़ थी या
हम पढ़ लिख कर भी अनपढ़ हैं,
एबीसीडी क्या पढ़ ली, उनकी
आस्था को कहते हम बुढ़बक हैं।
वह पढ़े लिखे तो कम होंगे,
पर छाया देख समय बतलाते थे,
धूप छाँव पाने की ख़ातिर,
पीपल, वटवृक्ष लगाते थे।
झब्बर झब्बर चले पुरवाई,
तब जानौ वर्षा ऋतु आई,
पूर्वानुमान लगाते थे, वह
सबको आस बँधाते थे।
उठे कांकड़ा फूली कांस,
अब नाहीं वर्षा की आस,
वह भविष्य वाणी करते थे,
सच्चाई जग को बताते थे।
तुलसी माँ की पूजा करते थे,
पीपल, बरगद भी पूजे जाते थे,
घर की मुँडेर पर चिड़ियों का,
पानी भर कर रखवाते थे।
कुएँ से पानी खींच खींच कर,
बाल्टी लोटे से नहाते थे,
यदि नल का पानी आवे घर
में तो नाली में नहीं बहाते थे।
सब्ज़ी के छिलके, कूड़ेदान में
नहीं, गायों को ही खिलाते थे,
शीशे का बर्तन यदि टूटे तो
कूड़ेदान से अलग रखवाते थे।
गीता, रामायण, वेद पाठ,
उपनयन संस्कार करवाते थे,
सुबह शाम मंदिर में पूजा,
ईश्वर से नित मिलवाते थे।
आस्था विश्वास अटल उनके,
हम सबको डाँट पिलाते थे,
जड़ ज़मीन जंगल फैले, उत्तम
कृषि, पशु पालन साधन थे।
अब सब कुछ धरती पर खोकर,
आदित्य विनाश ले आये हैं,
क्या वह पीढ़ी ही अनपढ़ थी, या
हम पढ़ लिख कर भी अनपढ़ है।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
AI निर्मित हरदोई में खून से मांग भरने का दावा, डेढ़ साल साथ रहने के…
कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ से देश में शोक की लहर! 19 श्रद्धालुओं की मौत से…
फोटो Goo मधेपुरा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव…
शायद मैं भी जिंदा नहीं बच पाता’, कोलकाता भगदड़ के चश्मदीद सोनू की दर्दभरी दास्तां,…
शीतला माता मंदिर मार्ग पर भीषण हादसा: 13 की मौत से पसरा मातम, 40 घायल…
AI निर्मित बाजा कैलिफोर्निया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) मेक्सिको के बाजा कैलिफोर्निया तट के पास…