नहीं पहुंचे महाकुंभ, तो माघी पूर्णिमा पर घर पर ही करें स्नान-दान

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। सनातन धर्म में माघ पूर्णिमा महत्वपूर्ण स्थान है। माघ पूर्णिमा को देव पूर्णिमा कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सभी देव गंगा नदी में स्नान के लिए पृथ्वी पर आते हैं। माघ माह के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को माघ पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। माघ पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन दान-पुण्य आदि धार्मिक कार्यों किया जाता है।
कहा जाता है कि इस दिन किए गए स्नान और दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। इस समय तीर्थराज प्रयागराज चल रहे महाकुंभ का पांचवां स्नान माघ पूर्णिमा के दिन होगा। आप महाकुंभ के स्नान का पुण्य प्राप्त करना चाहते हैं। लेकिन ट्रैफिक जाम, भारी भीड़ या किसी अन्य कारण से महाकुंभ नहीं जा रहे हैं। तो आप घर पर ही स्नान और पूजा पाठ कर के महाकुंभ के स्नान में मिलने वाला पुण्य लाभ उठा सकते हैं।
इस साल माघी पूर्णिमा, 12 फरवरी 2025 दिन बुधवार को है। इसी दिन माघ पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाएगा और कुंभ में पूर्णिमा का अमृत स्नान होगा।

पूर्णिमा पर घर पर इस तरह से करें स्नान और पूजन
माघ पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है। अगर आप स्नान के लिए महाकुंभ नहीं जा पा रहे हैं तो घर पर ही स्नान कर के महाकुंभ जैसा पुण्य लाभ उठा सकते है। इसके लिए सुबह जल्दी उठकर घर की अच्छे से सफाई करें। इसके बाद स्नान के लिए नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगा जल मिलाएं और इस पानी से स्नान करें। स्नान करते समय मां गंगा का ध्यान करें और इस मंत्र का ध्यान करे:
गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिंधु कावेरी जलेस्मिन् सन्निधिं कुरू।
अगर इस मंत्र का जाप नहीं कर सकते हैं तो मां गंगा के अन्य मंत्रों का जाप भी किया जा सकता है। जैसे- नमामि गंगे! या ॐ नमो गंगायै विश्वरुपिणी नारायणी नमो नम:।
स्नान के बाद पूजन और दान भी बहुत महत्व है। इसलिए स्नान करने के बाद सबसे पहले सूर्य देव की उपासना करें और उन्हें अर्घ्य देने के बाद तुलसी जी को जल अर्पित करें। इसके बाद घर के मंदिर में धूप और दीप जलाकर विधि-विधान से श्रद्धा पूर्वक भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा अर्चना करें और व्रत रखें। इसके बाद आप जरूरतमंद या गरीब लोगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार दान जरूर करें। इस दिन दान में अन्न, तिल, गुड, गर्म कपड़े आदि दान में दे सकते हैं।
मान्यताओं के अनुसार इस विधि से घर पर स्नान – दान करने से महाकुंभ या पवित्र नदी में स्नान में किए गए पुण्य जितना ही फल प्राप्त होता है।

rkpNavneet Mishra

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