आई.आई.टी. बाबा से समाज को सीख लेने की आवश्यकता है वर्ना बच्चे ऐसे ही भटकते रहेंगे

पूर्णिया/बिहार (राष्ट्र की परम्परा)। 144 साल बाद प्रयागराज में पूर्ण कुंभ का आयोजन किया गया है, और ढेर सारे साधु संत नागा साधु, अघोरी साधु, विभिन्न संप्रदाय के साधु संत, संयासी सभी प्रयागराज स्नान के लिए पधार रहे है,साधु संतों के साथ-साथ आम जनों की संख्या भी भारी तादाद में जो लगातार कुंभ स्नान के लिए पहुंच रहे है। इस स्नान का मकसद शरीर के अंदर के जल को बाहर के जल से मिलाना है जिससे मन और तन दोनों को शुद्ध हो जाए , क्योंकि हमारे शरीर में 75% पानी है और यह पानी, पानी को देखकर आकर्षित होता है और जब यह दोनों मिल जाता है तो उर्जा का असीम संचार होता है जो हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं ।ऐसा अपने देखा होगा कि, गंगा स्नान या और भी किसी नदी में स्नान करने के बाद इंसान तरोताजा हो जाता है जो कि नलकूप के पानी से नहीं होता है ,इसीलिए सनातन धर्म में स्नान का विशेष महत्व ,इसलिए अमावस्या पूर्णिमा के दिन नदी में स्नान का विधान है। कुंभ स्नान का इसी स्नान का बृहत हिस्सा है। इस बार के कुंभ स्नान में आई.आई.टी.वाले बाबा अभय सिंह की चर्चा चारों ओर हो रही है और होनी भी चाहिए, क्योंकि उसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है और यह सोचने पर विवश कर दिया है कि हमारी समाजिक व्यवस्था ऐसी क्यों है कि बच्चे अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं,सही मार्ग भटक जाते हैं,नशा करने लगते हैं,अपराधी बन‌ जाते , क्यों ? क्योंकि कहीं न कहीं परवरिश का और संगति का पूरा असर बच्चों पर पड़ता है,वह जो भी बनता है वह हमारे परिवार और हमारे समाज की ही देन होता है। इस बार के कुंभ स्नान में आई.आई.टी.वाले बाबा अभय सिंह की भी यही कहानी है।आई आईं टी निकालना हर बड़े अधिकारी,नेता ,या हर छोटी-बड़े पोस्ट पर काम करने वाले लोगों की ख्वाहिश होती है कि, उनके बच्चे आई आई टी से बी टेक करें, मगर यह सपना उस माता-पिता का पुरा होता है जो अपने बच्चों का पुरा ध्यान रखतें हैं,या उस छात्र का पुरा होता है जो पढ़ने में लगनशील और होनहार होते हैं।ये सभी छात्र और उनके अभिभावक जानते हैं कि, आईआईटी कॉलेज तक पहुंचाने के लिए कठिन मेहनत की आवश्यकता है और जो बच्चा यह कठिन मेहनत कर सकता है आई आई टी तक पहुंच पाता है।
अभय सिंह ने भी कठिन मेहनत की वह पढ़ाई लिखाई में होनहार है वह सब कुछ कर सकता है मगर हमारी समाजिक व्यवस्था ने उसे हरा दिया, उसे तोड़कर रख दिया,उसने जो परिवार समाज में देखा ,उसे न बदल पाने की कुंठा ने उसे तोड़कर रख दिया। बहुत लोगों का कहना है कि, नशे की लत‌ ने उसे इस मार्ग पर ले आया?ये सही भी हो सकता है क्योंकि व्यक्ति या कोई भी बच्चा जब आत्मविश्वास की शून्यता पर पहुंच जाता है अपने आप को बेहद कमजोर पता है तभी वह नशे का सहारा लेता है? हमारे समाज में ऐसे भी लोग हैं ऐसे भी छात्र है जो जानबूझकर ऐसे कमजोर बच्चों को नशे की तरफ धकेलते हैं या गलत दिशा की तरफ धकेलते हैं, क्योंकि हमारे समाज में लोग बुरा करने की सीख समाज से ले लेते हैं और अच्छाई की सीख उन्हें कोई दे नहीं पाता, क्योंकि गिरतो को देखकर सभी हंसते हैं। कोई व्यक्ति या कोई भी नशा करने वाला बच्चा किसी न किसी बात से आघात घायल रहता है और वह गलत कदम पर चल देता है। हर व्यक्ति नाजुक दिल का होता है और उसे प्रेम चाहिए और उसे हमारे आसपास के वातावरण में भी प्रेम का संचार चाहिए होता है। प्राय देखा गया है कि जो माता-पिता आपस में ज्यादा लड़ाई करते हैं उसके बच्चे बहुत ज्यादा कुंठित होते हैं और जिन माता-पिता में आपस में प्रेम अधिक होता है उनके बच्चे मानसिक तौर पर ज्यादा मजबूत होते हैं और जीवन में ज्यादा अच्छा करते हैं, अच्छाई की मिसाल देते हैं। माता-पिता ही वह धूरी है जो बच्चों को हर कदम पर संभालते हैं और हर कदम पर जीना सिखाते हैं। आईआईटी अभय सिंह का प्रत्येक इंटरव्यू इस बात का गवाह है कि, हमारे समाज को बदलने की आवश्यकता है सदियों से जो समाज में औरतों के प्रति कमजोर नजरियां का जो विधान रहा है कहीं न कहीं उसे बदलने की आवश्यकता है अन्यथा बहुत सारे बच्चों की जिंदगी बर्बाद होती रहेगी जैसे की होती आई है । आई.आई.टी. बाबा अभय सिंह तो मीडिया के सामने आ गए तो पता चल गया कि इन्होंने इतनी अच्छी जगह से पढ़ाई करके अध्यात्म के मार्ग को पकड़ लिया, मगर बहुत सारे बच्चे ऐसे भी हैं जो सोशल मीडिया तक नहीं आ पाते और इनकी संख्या हजारों में है। अच्छा करते-करते बच्चों को नशे की लत लग जाती हैं, गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं और इसमें कहीं ना कहीं हमारी सामाजिक व्यवस्था जिम्मेदार है और इसे बदलने की बहुत ही ज्यादा आवश्यकता है। वैसे मां-बाप जो अब भी अभय सिंह के जीवन से सीख नहीं लेंगे, और परिवार और बच्चों की अहमियत नहीं देंगे वह अपने बच्चों को बाबा बनते हुए ,अपने हाथ से बाहर जाते हुए देखते रहेंगे और कुछ भी नहीं कर पाएंगे। वक्त अभी भी है विचार अवश्य करें।

Karan Pandey

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