महाशिवरात्रि 2026: बाबा भोलेनाथ ने त्यागा वैराग्य, अपनाया वैवाहिक जीवन – आचार्य अजय शुक्ल
15 फरवरी को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा महाशिवरात्रि पर्व
सलेमपुर, देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। हिन्दू पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 15 फरवरी को पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर आचार्य अजय शुक्ल ने महाशिवरात्रि के धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
आचार्य अजय शुक्ल के अनुसार, महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं बल्कि जीवन में संतुलन और गृहस्थ धर्म की महत्ता को समझने का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन बाबा भोलेनाथ ने वैराग्य का मार्ग त्यागकर वैवाहिक जीवन को स्वीकार किया और माता पार्वती के साथ विवाह बंधन में बंधे। शिवपुराण में वर्णित है कि इस दिव्य विवाह से सृष्टि के संतुलन और सृजन को नई दिशा मिली।
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शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन विवाहित दंपत्ति यदि सपत्नीक व्रत रखकर श्रद्धा से पूजा-अर्चना करते हैं तो उनके दाम्पत्य जीवन के कष्ट दूर होते हैं और गृहस्थ जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वहीं अविवाहित श्रद्धालु इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करें तो उन्हें उत्तम जीवनसाथी का वरदान प्राप्त होता है।
जलाभिषेक का सही समय और विधि
आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक ब्रह्म मुहूर्त से लेकर प्रातः 11 बजे तक करना सर्वाधिक शुभ और फलदायी माना गया है। शास्त्रों में संध्या के समय जलाभिषेक को वर्जित बताया गया है। शुद्ध मन, पवित्र जल और सही विधि से की गई पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
शिव पूजा में प्रिय और वर्जित सामग्री
भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, मदार पुष्प, अक्षत (अखंड चावल), चंदन अत्यंत प्रिय हैं। इन सामग्रियों से की गई पूजा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
वहीं शास्त्रों के अनुसार लाल रंग के फूल, केतकी, चंपा और केवड़े के फूल शिवलिंग पर अर्पित करना निषिद्ध है। इसके साथ ही शिवलिंग पर सिंदूर चढ़ाना और श्रृंगार के बाद जलाभिषेक करना भी वर्जित माना गया है।
महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धालुओं को संयम, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। सच्चे मन से की गई आराधना से बाबा भोलेनाथ अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं और जीवन के समस्त कष्टों का निवारण करते हैं।
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