महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। रंगों और उल्लास का पर्व होली इस बार जनपद में पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। गांव से लेकर शहर तक लोग रंग, गुलाल और अबीर से सराबोर नजर आए। गलियों और मोहल्लों में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। हालांकि, इस खुशियों के पर्व के बीच कुछ स्थानों पर हुई दुखद घटनाओं ने कई परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया।
होली के दिन लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व का आनंद लिया। सुबह से ही घरों में पकवान बनने लगे और लोग एक-दूसरे के घर जाकर रंग लगाकर बधाई देते दिखाई दिए। कई स्थानों पर होली मिलन समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जहां ढोल-नगाड़ों और होली गीतों की धुन पर लोग झूमते नजर आए। बाजारों में भी दिनभर रौनक बनी रही और रंग, गुलाल, पिचकारी तथा मिठाइयों की दुकानों पर अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली।
दूसरी ओर कुछ स्थानों पर सड़क दुर्घटनाओं और अन्य अप्रिय घटनाओं ने उत्सव की खुशियों को फीका कर दिया। विभिन्न हादसों में कुछ लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं के बाद प्रभावित परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई और जिन घरों में रंगों की खुशियां होनी थीं, वहां मातम छा गया।
प्रशासन की ओर से लगातार अपील की जाती रही कि लोग त्योहार के दौरान संयम और सावधानी बरतें, शराब पीकर वाहन न चलाएं और भाईचारे व शांति के साथ होली मनाएं। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर लापरवाही और नशे में हुड़दंग के कारण दुर्घटनाएं और विवाद की स्थितियां भी पैदा हुईं।
लोगों का कहना है कि त्योहार खुशियों और आपसी प्रेम का संदेश देते हैं, लेकिन जब उनमें संयम और जिम्मेदारी का अभाव हो जाता है तो वही पर्व कभी-कभी दर्द और पछतावे की वजह बन जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि समाज के सभी वर्ग मिलकर त्योहारों को शांति, सौहार्द और जिम्मेदारी के साथ मनाने की परंपरा को मजबूत करें।
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