होलाष्टक प्रारंभ, नही होंगे शुभ कार्य

होलाष्टक में मांगलिक कार्यों के शुभ फल नही होते हैं प्राप्त

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। सनातन धर्म में होली के पर्व को बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार के 8 दिन पहले से होलाष्टक प्रारंभ हो जाता है। इस साल होली 25 मार्च को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 16 मार्च की रात 9 बजकर 39 मिनट से होगी और जिसका समापन 17 मार्च की सुबह 9 बजकर 53 मिनट पर होगा। ऐसे में होलाष्टक 17 मार्च से लगेगा, जो 24 तारीख को समाप्त होगा। इसके बाद 25 मार्च को होली मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान मांगलिक कार्यों के शुभ फल प्राप्त नहीं होते हैं।
होलाष्टक के दौरान शादी, नामकरण, गृह-प्रवेश, मुंडन संस्कार जैसे कई तरह के अनुष्ठानों पर रोक लग जाती है। इसके अलावा होलाष्टक की अवधि के समय यज्ञ और हवन भी नहीं करना चाहिए। इस दौरान निवेश या व्यापार भी नहीं शुरू किया जाता। मन्यता है कि ऐसा करने से नुकसान का खतरा अधिक बढ़ जाता है। होलाष्टक के दौरान नए मकान, चल-अचल संपत्ति जैसे गहने और गाड़ी की खरीदारी भी नहीं करनी चाहिए। साथ ही इस दौरान मकान का निर्माण भी नहीं शुरू करना चाहिए।
होलाष्टक से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु के परम भक्त और अपने बेटे प्रह्लाद को मारने के लिए फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि तय की थी। इस तारीख से 8 दिन पहले हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को कई यातनाएं दी थी। प्रह्लाद को इतने कष्ट इसलिए दिए गए। ताकि वह डर कर अपने पिता का भक्त बन जाए, लेकिन इन यातनाओं को सहन करने के बाद भी प्रह्लाद ने भगवान विष्णु की भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा। जिसके बाद हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से मदद मांगी। होलिका को वरदान मिला था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी। हिरण्यकश्यप ने बहन को प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठने का आदेश दिया। ताकि वह जलकर मर जाए। अपने भाई के आदेश का पालन करते हुए होलिका प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गई, लेकिन तब भी वह भगवान विष्णु के नाम का जाप करते रहे और नारायण की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका उस आग में जलकर भस्म हो गई। यह सारी घटना उन्हीं 8 दिनों में हुई। जिन्हें होलाष्टक के नाम से जाना जाता है। इसीलिए होली के 8 दिन पहले सारे शुभ काम वर्जित हो जाते हैं।

Editor CP pandey

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