बहराइच (राष्ट्र की परम्परा) । घास फूस से पटा तालाब बघेल में आने से देर कर रहे विदेशी मेहमान पक्षी, जिससे सूनी पड़ी है तालाब की कलाकृति,जनपद बहराइच के विकास खंड पयागपुर अन्तर्गत चौदह कोस के परिध में फैला तालाब बघेल अपना गौरवशाली इतिहास को समेटे हुए है, जहां दूर दराज से सैलानी घूमने आते थे और विदेशी मेहमान पक्षियों के कलरव को सुनकर मंत्र मुग्ध रहते थे।
लेकिन अब धीरे-धीरे इस विशालकाय तालाब का दायरा भी काम होते जा रहा है जहां तालाब में पानी के जगह घास, फूस से पट चुका है,जिससे मानसरोवर जैसे पवित्र स्थल से उड़ान भरकर नवंबर माह आते ही विभिन्न प्रजाति के पक्षियों का जमावड़ा शुरू हो जाता था पर दिसंबर माह के आधा बीतने वाला है। परन्तु अभी तक मेहमान पक्षियों की आमद शुरू नहीं हो सकी है जिससे चौदह कोस में फैले तालाब में पक्षियों का कलरव, सुनाई नही पड़ रही है,जबकि 20 वर्ष पूर्व जनपद बहराइच के जिलाधिकारी अतुल बगाई ने तालाब बघेल को पक्षी शरण स्थल घोषित किया था, तथा फूलमती घाट पर सैलानियों के लिए झूला, बैठने के लिए व्यवस्था मचान आदि तमाम व्यवस्था की थी परन्तु उनके स्थानांतरण के बाद व्यवस्था धूल फाकने लगी वैसे आने वाली विदेशी मेहमान पक्षियों में साइबेरियन, डॉग, स्वीपर, वत, सीपी जैसे विभिन्न प्रकार के पक्षियों का आगमन होता रहा है। किन्तु इस बार पक्षी रूठे हुए हैं और पक्षियों के सुरक्षा का जिम्मेदारी लिए वन क्षेत्रा अधिकारी हरिश्चंद्र त्रिपाठी से इस सन्दर्भ में बात किया गया तो उन्होंने बताया कि इस बार अभी तक विदेशी मेहमान पक्षियों का आमद शुरू नहीं हुआ है, इसका मुख्य कारण घास, फूस होना चारा का अभाव माना जा रहा है।
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