धरती की मुस्कान है हरियालीः पेड़-पौधों से ही सुरक्षित है जीवन, प्रकृति और आने वाली पीढ़ियां

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। तेजी से बढ़ते औद्योगीकरण, शहरीकरण और अंधाधुंध विकास के इस दौर में धरती का प्राकृतिक संतुलन लगातार बिगड़ता जा रहा है। बढ़ता प्रदूषण, तपती गर्मी, घटती हरियाली और असमय होने वाली वर्षा साफ संकेत दे रही है कि प्रकृति संकट में है। ऐसे समय में यदि धरती को कोई संजीवनी मिल सकती है, तो वह है हरियाली। पेड़-पौधे केवल पर्यावरण की शोभा नहीं, बल्कि मानव जीवन, वन्यजीव और संपूर्ण जैव विविधता के लिए जीवन-रेखा हैं। सच तो यह है कि धरती की असली मुस्कान हरियाली से ही झलकती है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पेड़-पौधे वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। हरियाली से वर्षा चक्र संतुलित रहता है, भूजल स्तर बढ़ता है और बढ़ते तापमान पर नियंत्रण रहता है। जंगलों और पेड़ों की मौजूदगी ही बाढ़, सूखा और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं को रोकने में सहायक होती है। इसके विपरीत, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने जलवायु परिवर्तन की गति को और तेज कर दिया है, जिसका सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ रह है।
बीते कुछ वर्षों में विकास की आड़ में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई है। नतीजतन गर्मी का प्रकोप बढ़ा है, जलस्रोत सूख रहे हैं और धरती का तापमान लगातार ऊपर जा रहा है। असमय बारिश, कभी अतिवृष्टि तो कभी सूखा—ये सभी प्रकृति के असंतुलन का संकेत हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अब भी नहीं संभले, तो आने वाला समय और अधिक भयावह हो सकता है।
इन्हीं चिंताओं को देखते हुए जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जनभागीदारी के साथ वृक्षारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं। स्कूलों, महाविद्यालयों, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से आम, पीपल, नीम, बरगद, अर्जुन जैसे छायादार और फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति लोगों में जिम्मेदारी का भाव पैदा करना है।
अभियानों के दौरान यह संदेश विशेष रूप से दिया जा रहा है कि पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे पेड़ बनने तक बचाना और उसकी देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है। समय-समय पर सिंचाई, सुरक्षा और देखरेख के अभाव में हजारों पौधे नष्ट हो जाते हैं, जिससे अच्छे प्रयास भी निष्फल हो जाते है।
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि हर व्यक्ति वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी जिम्मेदारी लेने का संकल्प कर ले, तो पर्यावरण की तस्वीर बदली जा सकती है। इससे आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा। हरियाली से गांव और शहर सुंदर बनते हैं, तापमान संतुलित रहता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
प्रकृति प्रेमियों का साफ कहना है कि यदि आज हमने हरियाली नहीं बचाई, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है।

rkpnews@somnath

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