10 दिसंबर के गौरवशाली जन्म—वे महान व्यक्तित्व जिनकी प्रतिभा ने रचा भारत के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय

10 दिसंबर—इतिहास के पन्नों पर दर्ज वो तारीख, जब भारत को मिले अद्वितीय प्रतिभा-स्रोत

भारत के इतिहास में 10 दिसंबर का दिन इसलिए विशेष है क्योंकि इसी तारीख ने कई ऐसे महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया, जिन्होंने राष्ट्र के निर्माण, संस्कृति, स्वतंत्रता संघर्ष, शिक्षा, राजनीति और इतिहास लेखन में अमिट योगदान दिया। आइए इन विभूतियों के जीवन, जन्मस्थल और उनके राष्ट्रहित कार्यों पर विस्तृत प्रकाश डालते हैं—

हंसमुख धीरजलाल सांकलिया (1908)
हंसमुख धीरजलाल सांकलिया का जन्म गुजरात के नवसारी जिले में हुआ। वे भारत के उन पुरातत्त्वविदों में शामिल थे जिन्होंने भारतीय प्राचीन इतिहास की जड़ों को वैज्ञानिक पद्धति से दुनिया के सामने रखा। उन्होंने प्रागैतिहासिक संस्कृतियों, विशेषकर ज्योपॉल एवं नवपाषाण कालीन सभ्यताओं के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी खोजों ने भारतीय पुरातत्व विज्ञान को एक नई दिशा प्रदान की और भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाया।

एस. निजलिंगप्पा (1902)
कर्नाटक के चित्तपुर में जन्मे एस. निजलिंगप्पा भारतीय राजनीति में सरलता, स्वच्छ चरित्र और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक माने जाते हैं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे साथ ही कर्नाटक के विकास में उनका योगदान ऐतिहासिक है। शिक्षा, ग्रामीण विकास और कृषि सुधारों पर उनके योजनात्मक कार्यों ने प्रदेश को नई पहचान दी। वे भारत के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने राजनीति को जनता के हितों से जोड़ा।

प्रफुल्लचंद चाकी (1888)
बंगाल के बोगरा जिले में जन्मे प्रफुल्लचंद चाकी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उग्र क्रांतिकारियों में से एक थे। उन्होंने ब्रिटिश अत्याचार के खिलाफ हथियार उठाया और खुदीराम बोस के साथ वंदेमातरम् का नारा बुलंद करते हुए क्रांति का मार्ग चुना। उनकी शहादत ने युवाओं में आज़ादी के लिए जुनून भर दिया। भारत की स्वतंत्रता यात्रा में उनका बलिदान हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

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मोहम्मद अली (1878)
उत्तर प्रदेश के रामपुर में जन्मे मोहम्मद अली जौहर एक महान स्वतंत्रता सेनानी, विचारक, पत्रकार और शिक्षाविद थे। उन्होंने The Comrade व Hamdard जैसे अख़बारों के माध्यम से ब्रिटिश सरकार की नीतियों का जमकर विरोध किया। खिलाफत आंदोलन में उनका नेतृत्व अद्वितीय रहा। वे शिक्षा और पत्रकारिता में भी भारतीयों के लिए नई चेतना जगाने वाले व्यक्तित्व थे।

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (1878)
तमिलनाडु के होसुर में जन्मे राजगोपालाचारी भारत के अंतिम गवर्नर जनरल, प्रभावशाली राजनीतिज्ञ, लेखक और दार्शनिक थे। वे गांधीजी के करीबी सहयोगी रहे और नीतिगत राजनीति के अग्रदूत माने जाते हैं। उन्होंने दक्षिण भारत में सामाजिक सुधार, शिक्षा और स्वराज आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई। उनकी लेखनी ने भारतीय साहित्य को मूल्यवान योगदान दिया।

यदुनाथ सरकार (1870)
बंगाल के बांकीपुर (अब बिहार में) जन्मे यदुनाथ सरकार भारतीय इतिहास के महान इतिहासकार माने जाते हैं। उन्होंने औरंगज़ेब एवं मराठा इतिहास पर विस्तृत, शोधपरक और प्रमाणिक लेखन किया। उनकी पुस्तकों ने भारतीय इतिहास को तथ्यपरक और अकादमिक रूप में मजबूती प्रदान की। इतिहास लेखन में उनकी निष्पक्ष शैली आज भी विद्वानों की पहली पसंद है।

इन सभी महान विभूतियों का जन्म 10 दिसंबर को होना इस दिन को राष्ट्रीय गौरव की तिथि बना देता है। इनका जीवन भारत की सांस्कृतिक, राजनीतिक, ऐतिहासिक और स्वतंत्रता की धारा को दिशा देने वाला स्तंभ है।

Editor CP pandey

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