मतदाता सूची में लापरवाही पड़ी भारी! अब सीधे निशाने पर जिला निर्वाचन अधिकारी, रोज करनी होगी ऑनलाइन निगरानी
लखनऊ, (राष्ट्र की परम्परा)। मतदाता सूची में गड़बड़ी, आवेदनों को लटकाने और शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं! उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और अपडेट रखने के लिए निर्वाचन तंत्र ने जवाबदेही का दायरा सख्त कर दिया है। अब केवल अधीनस्थ अधिकारियों पर जिम्मेदारी डालकर जिला निर्वाचन अधिकारी अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकेंगे। उन्हें खुद प्रतिदिन ईसीआई नेट पर लॉगिन कर मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की निगरानी और समीक्षा करनी होगी। लापरवाही या अनावश्यक देरी सामने आने पर संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी की जवाबदेही तय कर कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मतदाता सूची से संबंधित कार्यों के समन्वय, पर्यवेक्षण, अनुश्रवण और गुणवत्ता नियंत्रण की संपूर्ण जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारी की होगी। उद्देश्य साफ है—कोई पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे और किसी आवेदन या शिकायत को बेवजह लंबित न रखा जाए।
रोजाना लॉगिन, हर आवेदन पर नजर
निर्देशों के मुताबिक जिला निर्वाचन अधिकारियों को प्रतिदिन अपने लॉगिन से ईसीआई नेट पर उपलब्ध सुविधाओं का इस्तेमाल करते हुए कार्यों की समीक्षा करनी होगी। उप जिला निर्वाचन अधिकारी से लेकर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, बीएलओ सुपरवाइजर और बूथ लेवल अधिकारी तक के प्रोफाइल की जांच की जाएगी। नाम, मोबाइल नंबर, पदनाम और फोटो सही हैं या नहीं, इसकी पुष्टि के साथ अधिकारियों के अंतिम लॉगिन की भी निगरानी होगी। निष्क्रिय यूजर, अधूरी प्रोफाइल या त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची मिलने पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
फार्म-6 से 8 तक लंबित आवेदन नहीं होंगे नजरअंदाज
नए निर्देशों में फार्म-6, फार्म-6ए, फार्म-7 और फार्म-8 के निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया है। इन आवेदनों की प्राप्ति, लंबित मामलों और निस्तारण की रोजाना समीक्षा करनी होगी। किसी आवेदन को अनावश्यक रूप से ईआरओ या एईआरओ स्तर पर रोककर रखने की अनुमति नहीं होगी। गलत अधिकारी को भेजे गए आवेदन को तत्काल सही अधिकारी के पास री-असाइन करना होगा। दूसरे जनपद से संबंधित आवेदन को भी बिना देरी संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी के पास भेजना होगा।
शिकायतों पर भी होगी सख्त निगरानी
मतदाता सूची और मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) से जुड़ी शिकायतों का केवल कागजी निस्तारण अब पर्याप्त नहीं माना जाएगा। राष्ट्रीय शिकायत सेवा पोर्टल (एनजीएसपी) सहित अन्य माध्यमों से मिली शिकायतों की दैनिक समीक्षा करनी होगी। जिला निर्वाचन अधिकारी या उनके द्वारा नामित वरिष्ठ अधिकारी शिकायतों के जवाबों का सैंपल परीक्षण भी करेंगे, ताकि पता चल सके कि शिकायत का समाधान वास्तव में हुआ है या केवल औपचारिकता निभाई गई है। लंबित मामलों की साप्ताहिक समीक्षा बैठक कर कारणों की पड़ताल और संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बीएलओ की कॉल का 48 घंटे में जवाब जरूरी
नागरिकों के लिए जारी एक अहम निर्देश ‘बुक ए कॉल विद बीएलओ’ सुविधा से जुड़ा है। ईसीआई नेट ऐप और आधिकारिक नागरिक सेवा पोर्टल voters.eci.gov.in पर इस सुविधा के तहत दर्ज कोई भी कॉल रिक्वेस्ट 48 घंटे से अधिक लंबित नहीं रहनी चाहिए। यदि बीएलओ समय पर नागरिक से संपर्क नहीं करता या बिना संपर्क किए ही आवेदन में ‘Contacted’ अथवा ‘Unavailable’ दर्ज कर देता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
लॉगिन पासवर्ड और ओटीपी साझा करने पर रोक
निर्वाचन अधिकारियों को यूजर आईडी, पासवर्ड और ओटीपी किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की हिदायत दी गई है। भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी जिला निर्वाचन अधिकारियों को सौंपी गई है। स्पष्ट संदेश: मतदाता सूची से जुड़े कामों में अब लापरवाही, अनावश्यक देरी और शिकायतों के औपचारिक निस्तारण को गंभीरता से लिया जाएगा। जिला निर्वाचन अधिकारियों को खुद निगरानी करनी होगी और जहां कमी मिलेगी, वहां सुधारात्मक तथा आवश्यकतानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
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