भोजन ईश्वर का वरदान है इसे सम्मान दे बांटें और जरूरतमंदों तक पहुंचाएं- संजय सर्राफ

राँची ( राष्ट्र की परम्परा )
झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता एवं कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि अगहन माह में अन्नपूर्णा माता की पूजा का विशेष महत्व है, हर वर्ष मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को मां अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष अन्नपूर्णा जयंती 4 दिसंबर दिन गुरुवार को मनाई जाएगी। अन्न और समृद्धि की देवी मां अन्नपूर्णा का यह पर्व भारत में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है।अन्नपूर्णा का अर्थ है-अन्न से पूर्ण कराने वाली देवी, यानी वह शक्ति जो संसार को जीवनदायी भोजन प्रदान करती है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा,अन्नदान और भंडारे का आयोजन किया जाता है। यह पर्व मानव जीवन में अन्न के महत्व को स्मरण कराता है। हिंदू दर्शन में अन्न को “ब्रह्म” कहा गया है क्योंकि भोजन ही शरीर, मन और जीवन का आधार है। मां अन्नपूर्णा को अन्न, धान्य, पोषण, वैभव और दया की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। जयंती के दिन उपवास व पूजन कर लोग जीवन में अन्न की निरंतर प्राप्ति और समृद्धि की कामना करते हैं। साथ ही, अन्नदान को सर्वोच्च दान माना गया है, इसलिए भक्त इस दिन गरीब व जरूरतमंदों को भोजन वितरित करते हैं।पौराणिक मान्यता के अनुसार एक समय ऐसा हुआ जब भगवान शिव ने माता पार्वती के सामने कहा कि संसार का सब कुछ मिथ्या है, यहां तक कि भोजन भी। शिव की यह बात पार्वती को अच्छी नहीं लगी। माता ने यह समझाने के लिए कि अन्न का जीवन में कितना महत्व है, पूरे संसार से अन्न को अदृश्य कर दिया। देखते ही देखते सृष्टि में अकाल पड़ गया, जीव-जंतु, मनुष्य सभी संकट में पड़ गए। कहीं भी अन्न का एक दाना तक उपलब्ध न रहा। जब भगवान शिव ने संसार में व्याप्त संकट को देखा, तब उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ और वे माता पार्वती से क्षमा मांगने पहुंचे। उस समय माता पार्वती ने अन्नपूर्णा स्वरूप धारण कर लिया था। उन्होंने काशी (वाराणसी) में सोने के कलश से भगवान शिव को स्वयं अपने हाथों से अन्न परोसा। तभी से देवी अन्नपूर्णा को भोजन की अधिपति शक्ति माना गया और यह विश्वास स्थापित हुआ कि संसार में अन्न की धारा माता अन्नपूर्णा की कृपा से ही चलती है। इस दिन अन्नपूर्णा मंदिरों में विशेष आरती होती है। घरों में चावल, गेहूं आदि प्रमुख अन्नों का पूजन किया जाता है। लोग संकल्प लेते हैं कि वे भोजन का सम्मान करेंगे और किसी भी रूप में अन्न का अपमान या अपव्यय नहीं करेंगे। जनमानस में यह भी विश्वास है कि इस दिन अन्नदान करने से घर में कभी अभाव नहीं होता। मां अन्नपूर्णा जयंती केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि समाज को खाद्य सुरक्षा, अन्न का संरक्षण और “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना से प्रेरित करने वाला अवसर है। इस दिन का सार यही है कि भोजन ईश्वर का वरदान है-इसे सम्मान दें, बांटें और जरूरतमंदों तक पहुंचाएं।

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