खाद माफियाओं पर कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई, ताबड़तोड़ छापेमारी से मचा हड़कंप

महराजगंज में कई खाद दुकानों पर नोटिस, लाइसेंस निरस्तीकरण की चेतावनी

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए ताबड़तोड़ छापेमारी अभियान चलाया। अचानक हुई इस कार्रवाई से खाद विक्रेताओं में हड़कंप मच गया। कई दुकानदार दुकानें बंद कर मौके से फरार हो गए, जबकि कई प्रतिष्ठानों में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

जिला कृषि अधिकारी शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर विकास खंड नौतनवा क्षेत्र के जमुहानी, जिगिना, रमगढ़वा और करमहवा गांवों में स्थित उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान शुक्ला खाद भंडार जमुहानी एवं यादव खाद भंडार करमहवा में उर्वरकों से संबंधित आवश्यक अभिलेख, स्टॉक रजिस्टर और बिक्री रजिस्टर अद्यतन नहीं पाए गए। इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए दोनों दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित लाइसेंस निरस्त कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

छापेमारी के दौरान कई खाद विक्रेता कार्रवाई से बचने के लिए दुकानें बंद कर फरार हो गए। इनमें खान ट्रेडिंग कंपनी जमुहानी, मां दुर्गा ट्रेडर्स जिगिना, मद्धेशिया खाद भंडार जिगिना, शुक्ला ट्रेडर्स खाद भंडार जिगिना और सिंह खाद भंडार जिगिना शामिल हैं। कृषि विभाग द्वारा इन सभी प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जवाब मिलने के बाद पुनः जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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जिला कृषि अधिकारी ने जनपद के सभी उर्वरक विक्रेताओं को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि खाद की दुकानें केवल प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक ही खुली रहेंगी। निर्धारित समय के बाहर किसी भी प्रकार की उर्वरक बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी।
उन्होंने निर्देश दिया कि खाद की बिक्री केवल जनपद के वास्तविक किसानों को ही की जाए तथा प्रत्येक बिक्री पर किसान का नाम, पता और मोबाइल नंबर बिक्री रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा। साथ ही यूरिया और डीएपी के साथ किसी अन्य उत्पाद की जबरन टैगिंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।

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कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति या फर्म उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी, तस्करी या अवैध टैगिंग में लिप्त पाई गई तो उसके विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जेल भेजने से भी विभाग पीछे नहीं हटेगा।

Karan Pandey

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