50 लाख की फिरौती नहीं मिली तो KGMU अफसर और दोस्त की हत्या! घाघरा नदी में फेंके शव, पांच गिरफ्ता
लखनऊ, (राष्ट्र की परम्परा)। लखनऊ में KGMU के असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट पवन कुमार गर्ग और उनके दोस्त सचिन विश्वकर्मा की गुमशुदगी का मामला अब कथित दोहरे हत्याकांड में बदल गया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों का 50 लाख रुपये की फिरौती के लिए अपहरण किया गया था। रकम नहीं मिलने पर आरोपियों ने कथित तौर पर दोनों की रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी और शवों को सीतापुर के चलहरी घाट के पास घाघरा नदी में फेंक दिया।
पुलिस ने इस मामले में नितिन मिश्रा, अवनीश कुमार मौर्य, प्रकाश सिंह, सूरज सिंह और मोहित सिंह को गिरफ्तार किया है। हालांकि, दोनों के शव अभी बरामद नहीं हुए हैं। SDRF, PAC, वॉटर पुलिस, गोताखोरों और स्थानीय पुलिस की टीमें नदी में तलाश अभियान चला रही हैं।
पुलिस जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी नितिन मिश्रा पहले से पवन कुमार गर्ग को जानता था। बताया जा रहा है कि पवन करीब 50 से 60 लाख रुपये की रकम से प्रॉपर्टी खरीदने में रुचि रखते थे। आरोप है कि नितिन को इसकी जानकारी हुई और उसने अपने साथियों के साथ मिलकर पवन के अपहरण की साजिश रची।
पुलिस के मुताबिक, 27 सितंबर की रात नितिन ने पवन को भिठौली क्रॉसिंग पर बुलाया था। पवन अपने दोस्त सचिन के साथ वहां पहुंचे। इसके बाद दोनों को इटौंजा क्षेत्र के एक ढाबे पर ले जाने और फिर अन्नामऊ स्थित निर्माणाधीन मकान में पहुंचाने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि दोनों को अलग-अलग कमरों में बंधक बनाया गया और पवन से 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई।
जांच में सामने आए पुलिस के दावे के अनुसार, पवन ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों को डर था कि दोनों को छोड़ने पर उनकी पहचान उजागर हो जाएगी। इसी वजह से 28 सितंबर की दोपहर दोनों की रस्सी से गला घोंटकर हत्या किए जाने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद आरोपियों ने दोनों शवों को वाहन से सीतापुर के चलहरी घाट तक पहुंचाया। वहां पुल से शवों को घाघरा नदी में फेंके जाने की बात जांच में सामने आई है। पुलिस अब शवों की तलाश के साथ घटना की पूरी कड़ी और इसमें शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपियों ने पवन की SUV को सीतापुर में छोड़ दिया था। जांच टीम ने CCTV फुटेज, टोल प्लाजा रिकॉर्ड, वाहनों की आवाजाही और तकनीकी निगरानी के आधार पर संदिग्धों की गतिविधियों का पता लगाया। इसके बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंची।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पवन की सोने की चेन, अंगूठी, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड और बैंक स्टेटमेंट की प्रतियां बरामद की गई हैं। वारदात में इस्तेमाल बताए जा रहे वाहनों को भी पुलिस ने जब्त किया है।
पवन कुमार गर्ग 27 सितंबर की रात घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। इसके बाद 29 सितंबर को परिजनों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के दौरान CCTV समेत तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला तो मामला अपहरण और हत्या की आशंका तक पहुंचा। 2 अक्टूबर को पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की।
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती पवन कुमार गर्ग और सचिन विश्वकर्मा के शवों को बरामद करना है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित साजिश में गिरफ्तार पांच आरोपियों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं। मामले की जांच जारी है।
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