आगरा (राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के बाद फतेहपुर सीकरी से सांसद राजकुमार चाहर ने विकास कार्यों की समीक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। बैठक के उपरांत उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन प्रकरणों में अनियमितता, शिकायत या गुणवत्ता संबंधी सवाल सामने आए हैं, उनकी जांच के लिए तत्काल कमेटियां गठित की जाएं और निर्धारित समयसीमा के भीतर जांच आख्या प्रस्तुत की जाए।
बैठक में विकास योजनाओं की पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। गंगाजल प्रोजेक्ट, मध्याह्न भोजन योजना, स्वच्छ भारत अभियान के तहत सफाई कर्मियों की नियुक्ति, कृषि विभाग द्वारा उपकरण वितरण तथा स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं पर गंभीरता से समीक्षा की गई।
गंगाजल परियोजना की गुणवत्ता को लेकर विशेष चिंता व्यक्त की गई और निर्माण कार्यों की जांच के लिए स्वतंत्र कमेटी गठित करने के निर्देश दिए गए। निर्माण एजेंसी द्वारा कराए गए कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और समयबद्धता की बारीकी से समीक्षा की जाएगी। स्पष्ट किया गया कि जनहित से जुड़े किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी व अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया कि विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए। बच्चों को परोसा जाने वाला भोजन पौष्टिक, स्वच्छ और मानकों के अनुरूप हो—इस पर विशेष बल दिया गया। किसी भी विद्यालय में अनियमितता मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
कृषि विभाग द्वारा वितरित उपकरणों, लाभार्थियों की सूची और बीमा योजनाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं। यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि वास्तविक पात्र किसानों को ही लाभ मिले और किसी प्रकार की अपारदर्शिता या पक्षपात न हो।
स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया की जांच के लिए कमेटी गठित कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। चयन प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप और पारदर्शी हो, इस पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपकरण, एक्स-रे मशीन, दवाओं तथा स्टाफ की उपलब्धता की भी समीक्षा की जाएगी। जहां कमी पाई जाए, वहां तत्काल सुधार कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ हो सकें।
इसके अतिरिक्त तहसीलों के उपजिलाधिकारियों को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की जांच कर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। सार्वजनिक संपत्ति को मुक्त कराना और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना प्राथमिकता बताया गया है।
बैठक के अंत में सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट किया गया कि जांच से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं होगी। निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, ताकि आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। दिशा बैठक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि विकास कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही सर्वोपरि है तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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