गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय को श्रेणी-1 विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए यह एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यूजीसी द्वारा दी जाने वाली यह मान्यता भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक प्रतिष्ठित मान्यता है।
यह मान्यता यूजीसी (ग्रेडेड स्वायत्तता प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालयों का वर्गीकरण) विनियम, 2018 के अनुसार शीर्ष प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालयों में स्वायत्तता को बढ़ावा देने के यूजीसी के प्रयासों का हिस्सा है।
कुलपति प्रो.पूनम टंडन ने कुलाधिपति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीमती आनंदीबेन पटेल की दूरदर्शिता और निरंतर मार्गदर्शन ने विश्वविद्यालय ऐतिहासिक उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कुलपति ने कहा कि मुख्यमंत्री श्रीयोगी आदित्यनाथ एवं उनकी सरकार के निरंतर समर्थन और मार्गदर्शन के लिए उनका आभार प्रकट करते हैं।
कुलपति प्रो.पूनम टंडन ने कहा, “यह मान्यता शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।”
कुलपति ने कहा कि “श्रेणी-1 का दर्जा हमें उच्च शिक्षा में वैश्विक उत्कृष्टता के लिए अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में लिए गए कदमों को और सशक्त बनाएगा। यह हमारे शिक्षण, अनुसंधान और समग्र शैक्षणिक मानकों को बढ़ाने के लिए हमारे लिए नए रास्ते खोलता है।”
यूजीसी ने 16 अप्रैल, 2024 को आयोजित अपनी 579वीं बैठक के दौरान श्रेणी-1 दर्जे के लिए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अनुरोध को मंजूरी दे दी। यह उन्नयन अपने साथ यूजीसी विनियमों की धारा 4 में उल्लिखित कई लाभ लाता है, जो शिक्षण और अनुसंधान में विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता को मान्यता देता है।
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