31 दिसंबर का इतिहास: जब समय ने करवट ली और दुनिया बदल गई

31 दिसंबर केवल साल का आख़िरी दिन नहीं है, बल्कि यह वह तारीख़ है जिसने राजनीति, युद्ध, स्वतंत्रता आंदोलनों, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, खेल और मानव त्रासदियों के रूप में इतिहास की दिशा बदली है। इस दिन घटित घटनाएँ आज भी विश्व की सामूहिक स्मृति में गहराई से अंकित हैं। आइए 31 दिसंबर को घटित इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं पर विस्तार से नज़र डालते हैं।

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2014 – शंघाई भगदड़: जश्न में बदला मातम
चीन के शंघाई शहर में नए साल की पूर्व संध्या पर आयोजित समारोह उस समय त्रासदी में बदल गया, जब भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक घटना में कम से कम 36 लोगों की मौत हुई और 49 से अधिक लोग घायल हो गए। यह हादसा शहरी भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल छोड़ गया। शंघाई की यह घटना बताती है कि उत्सव के क्षण भी प्रशासनिक चूक से जानलेवा बन सकते हैं।

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2008 – ईश्वरदास रोहिणी बने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष
31 दिसंबर 2008 को ईश्वरदास रोहिणी को दूसरी बार मध्य प्रदेश विधानसभा का अध्यक्ष घोषित किया गया। उनका पुनर्निर्वाचन राज्य की विधायी स्थिरता और राजनीतिक अनुभव का प्रतीक माना गया। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका संसदीय परंपराओं के संरक्षण और सदन की कार्यवाही को निष्पक्ष रूप से संचालित करने में अहम रही।

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1999 – IC-814 अपहरण: भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती
इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 का अपहरण कर आतंकियों ने उसे अफगानिस्तान के कंधार हवाई अड्डे पर उतार दिया। सात दिनों तक चला यह बंधक संकट भारत के लिए अभूतपूर्व कूटनीतिक और सुरक्षा परीक्षा था। अंततः 190 यात्रियों की सुरक्षित रिहाई हुई, लेकिन इस घटना ने आतंकवाद के वैश्विक खतरे और विमानन सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर कर दिया।

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1984 – राजीव गांधी बने भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री
31 दिसंबर 1984 को राजीव गांधी ने मात्र 40 वर्ष की आयु में भारत के सातवें प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला। यह आधुनिक भारत के राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण मोड़ था। उन्होंने तकनीक, दूरसंचार और युवा नेतृत्व को बढ़ावा दिया। इसी दिन भारतीय क्रिकेट को भी नया सितारा मिला, जब मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया।

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1988 – भारत-पाक परमाणु समझौता: शांति की पहल
भारत और पाकिस्तान ने 31 दिसंबर 1988 को एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दोनों देश एक-दूसरे के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला नहीं करेंगे। यह समझौता 27 जनवरी 1991 से प्रभावी हुआ। दक्षिण एशिया में परमाणु संतुलन और शांति बनाए रखने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जाता है।

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1964 – इंडोनेशिया का संयुक्त राष्ट्र से निष्कासन
राजनीतिक मतभेदों और अंतरराष्ट्रीय विवादों के चलते 31 दिसंबर 1964 को इंडोनेशिया को संयुक्त राष्ट्र से निष्कासित कर दिया गया। यह घटना शीत युद्ध के दौर की वैश्विक राजनीति को दर्शाती है। बाद में इंडोनेशिया ने पुनः संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता ग्रहण की, लेकिन यह निष्कासन अंतरराष्ट्रीय संबंधों के इतिहास में एक दुर्लभ उदाहरण बना।

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1929 – पूर्ण स्वराज्य का संकल्प
महात्मा गांधी के नेतृत्व में 31 दिसंबर 1929 को लाहौर में कांग्रेस अधिवेशन के दौरान पूर्ण स्वराज्य का ऐतिहासिक संकल्प लिया गया। इसी निर्णय ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को निर्णायक दिशा दी। यह दिन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक दृढ़ता और जनआंदोलन की शक्ति का प्रतीक बन गया।

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1600 – ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना
31 दिसंबर 1600 को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई, जिसने आगे चलकर भारत के इतिहास की दिशा ही बदल दी। व्यापार के नाम पर आई इस कंपनी ने धीरे-धीरे राजनीतिक सत्ता हासिल की और औपनिवेशिक शासन की नींव रखी। यह तारीख़ भारतीय इतिहास में ब्रिटिश राज की शुरुआत का संकेत मानी जाती है।

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निष्कर्ष– 31 दिसंबर का इतिहास यह बताता है कि समय के अंतिम दिन भी नए युग की शुरुआत और बड़े बदलावों का कारण बन सकते हैं। यह तारीख़ केवल कैलेंडर का पड़ाव नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की संघर्षपूर्ण, प्रेरक और कभी-कभी दर्दनाक स्मृतियों का संग्रह है।

Editor CP pandey

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