गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन को ऋषिका गार्गी सम्मान से विभूषित किया गया। यह सम्मान पाने वाली वह पहली शख्सियत बनीं। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।
अध्यात्म, चिकित्सा, शिक्षा एवं संस्कृति के प्रतिष्ठित केंद्र सिद्धपीठ मदरिया द्वारा दिए जाने वाला यह सर्वोच्च सम्मान है। सम्मान समारोह में 20 विशिष्ट समाजसेवी और संस्कृत-सेवी भी अलंकृत किए गए।
समारोह की मुख्य अतिथि प्रो. टंडन ने कहा कि गोरखपुर के मंदिरों द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्य उल्लेखनीय हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और आस्था का समन्वय ही समाज को प्रगति की ओर ले जाता है।
सिद्धपीठ के उत्तराधिकारी श्रीशदास जी महाराज ने कहा कि “अच्छे कार्यों को रेखांकित करना ही इस सम्मान समारोह का उद्देश्य है।” उन्होंने कहा कि यह गौरवपूर्ण है कि समारोह की शुरुआत कुलपति प्रो. पूनम टंडन को सम्मानित कर की गई। संचालन अजय शुक्ल ने किया
संस्कृत-सेवियों में डॉ. प्रवीण त्रिपाठी, अजीत राव, धीरेन्द्र तिवारी, विजय दुबे, अशोक पाण्डेय, हरपाल नागवानी, प्रेम सागर तिवारी, मनोज दूबे, सज्जन मिश्रा और अखिलेश दुबे (नन्हें) शामिल रहे। समाजसेवियों में ओमप्रकाश शुक्ल, अस्मिता चंद, सृन्जय मिश्र, दिनेश नायक, नागेंद्र नायक, नागेंद्र शर्मा, अमरनाथ वर्मा, संजय मिश्र, धीरज शुक्ल, सुनील दुबे, मूलचंद जायसवाल, सूरज पाण्डेय, विनय पाण्डेय, रामसखी रामनिवास चैरिटेबल ट्रस्ट व देवीप्रसाद मिश्र चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
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