देवरिया, (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा संचालित मिशन शक्ति फेज 5.0 के अंतर्गत जनपद देवरिया में महिलाओं और बालिकाओं के सुरक्षा, स्वावलंबन और सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए “बहू-बेटी अभियान” का बृहद स्तर पर संचालन किया गया। पुलिस अधीक्षक देवरिया के निर्देशन में जिले के सभी थानों की मिशन शक्ति टीमों एवं महिला पुलिसकर्मियों ने गांव-गांव और कस्बों में चौपाल लगाकर परित्यक्ता, तलाकशुदा, निराश्रित तथा दहेज उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को उनके अधिकारों और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक किया।
अभियान के दौरान महिला सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, सरकारी योजनाओं की जानकारी तथा नये आपराधिक कानूनों के विशेष प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह पहल सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जिले के सभी थानों में एक साथ चला विशेष अभियान
देवरिया के विभिन्न थाना क्षेत्रों में मिशन शक्ति टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर जागरूकता चौपाल आयोजित की। थाना तरकुलवा की टीम ने ग्राम कंचनपुर में, थाना महुआडीह ने ग्राम अकटहिया में, थाना रूद्रपुर ने आजाद नगर वार्ड में, थाना एकौना ने ग्राम डढ़िया में, थाना लार ने इन्द्रनगर वार्ड में, थाना खुखुन्दू ने भटहर टोला में, थाना भाटपार रानी ने ग्राम मदनचक में, थाना भटनी ने नूरीगंज में, थाना बरहज ने महिला घाट पर तथा थाना मईल ने ग्राम मईल में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर “बहू-बेटी अभियान” को जन-जन तक पहुंचाया।
इन चौपालों में महिला पुलिसकर्मियों ने स्थानीय महिलाओं और बालिकाओं से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को सुना और त्वरित समाधान की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान किया।
परित्यक्ता और निराश्रित महिलाओं के लिए विशेष पहल
अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में उपेक्षित और प्रताड़ित महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। परित्यक्ता, विधवा, तलाकशुदा एवं दहेज उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को सरकारी सहायता योजनाओं, कानूनी अधिकारों और पुनर्वास के विकल्पों के बारे में जानकारी दी गई।
महिला पुलिसकर्मियों ने बताया कि किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना या साइबर अपराध की स्थिति में महिलाएं तुरंत पुलिस और संबंधित हेल्पलाइन से संपर्क करें। उन्हें आश्वस्त किया गया कि प्रशासन उनकी सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
नये आपराधिक कानूनों पर विशेष जागरूकता
अभियान के अंतर्गत नये आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम—के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
महिलाओं को बताया गया कि इन कानूनों में ‘दंड से न्याय की ओर’ की अवधारणा को प्राथमिकता दी गई है, जिसमें पीड़ित-केंद्रित प्रावधानों को सुदृढ़ किया गया है। शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, डिजिटल साक्ष्य के महत्व, और त्वरित न्याय की व्यवस्था के बारे में भी विस्तार से समझाया गया।
हेल्पलाइन नंबरों की दी गई जानकारी
महिला सुरक्षा से संबंधित विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी साझा की गई, जिनमें आपातकालीन सेवा 112, महिला हेल्पलाइन 181, वूमेन पावर लाइन 1090, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, एंबुलेंस सेवा 108, जननी सुरक्षा 102, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तथा साइबर हेल्पलाइन 1930 शामिल हैं।
इन नंबरों का उपयोग कैसे और कब करना है, इस पर व्यावहारिक जानकारी दी गई, ताकि महिलाएं किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।
सरकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल
अभियान के दौरान महिलाओं को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई, जिनमें निराश्रित महिला पेंशन योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, नारी शक्ति वंदन योजना, नारी सम्मान-नारी सुरक्षा योजना और कन्या सुमंगला योजना शामिल हैं।
साथ ही निःशुल्क विधिक सहायता, फैमिली काउंसलिंग और कानूनी परामर्श जैसी सुविधाओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया। पंपलेट वितरित कर महिलाओं को योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
समाज में सकारात्मक बदलाव की पहल
देवरिया बहू-बेटी अभियान मिशन शक्ति फेज 5.0 के तहत चलाया गया यह व्यापक कार्यक्रम केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सोच में परिवर्तन का संदेश भी लेकर आया। महिला पुलिसकर्मियों ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित चौपालों के माध्यम से महिलाओं ने खुलकर अपनी समस्याएं साझा कीं, जिससे प्रशासन को जमीनी स्तर पर स्थिति समझने का अवसर मिला। कई मामलों में मौके पर ही मार्गदर्शन देकर समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल की गई।
निष्कर्ष
देवरिया बहू-बेटी अभियान मिशन शक्ति फेज 5.0 के तहत चलाया गया यह विशेष अभियान महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है। परित्यक्ता, तलाकशुदा, निराश्रित और दहेज पीड़ित महिलाओं को न्याय और सम्मान दिलाने की यह पहल समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनेगी।
प्रशासन की इस सक्रियता से स्पष्ट है कि महिला सुरक्षा और अधिकारों को लेकर सरकार और पुलिस तंत्र पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है। जागरूकता, कानूनी जानकारी और सरकारी योजनाओं से जुड़ाव के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का यह अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा।
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