लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी लखनऊ ने एक बार फिर वैज्ञानिक और नवाचार के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित दो दिवसीय सीएसआईआर स्टार्टअप कॉन्क्लेव का शुभारंभ मंगलवार को हुआ। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्यमिता, नवाचार और स्टार्टअप्स को महानगरों से आगे बढ़ाकर आकांक्षी शहरों तक पहुंचाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर-नेशनल बॉटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) परिसर में देश के पहले स्वस्तिक आकार के कमल उद्यान का उद्घाटन किया। लगभग 930 वर्ग मीटर में फैले इस अनूठे उद्यान में 60 किस्मों के कमल और 50 प्रजातियों की वॉटर लिली प्रदर्शित हैं। इसका मुख्य आकर्षण है एनबीआरआई-नमो 108 कमल, जो दुनिया का पहला 108 पंखुड़ियों वाला कमल है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह उद्यान न केवल जैव विविधता संरक्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि पर्यटन, फ्लोरीकल्चर, वेलनेस और कृषि-आधारित उद्योगों के लिए नए अवसर भी खोलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि लखनऊ अब केवल ऐतिहासिक स्मारकों जैसे इमामबाड़े के लिए ही नहीं, बल्कि 108 पंखुड़ियों वाले कमल और मिंट उत्पाद जैसी वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए भी जाना जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीएसआईआर की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की विशाल संस्थागत क्षमता और कुशल मानव संसाधन देश की विज्ञान और स्टार्टअप यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत के लगभग 50% स्टार्टअप अब टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2015 में शुरू हुए स्टार्टअप इंडिया अभियान के तहत जहां मात्र 350 स्टार्टअप थे, वहीं आज भारत में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप हैं, जिनमें लगभग 60% महिलाओं के नेतृत्व में हैं।
उन्होंने लखनऊ के वैज्ञानिक योगदानों का भी उल्लेख किया, जिनमें नमो 108 कमल, कीट-प्रतिरोधी कपास, फ्लोरीकल्चर मिशन से किसानों को नए रोजगार विकल्प और कैंसर व फैटी लिवर जैसी बीमारियों के लिए स्थानीय स्तर पर विकसित 13 नई दवाएं शामिल हैं।
मिंट (पुदीना) आधारित उत्पादों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लखनऊ ही वह स्थान है, जहां से दुनिया भर में प्रसिद्ध मेंटॉल उत्पाद और मिंट टैबलेट की शुरुआत हुई थी। वर्तमान में यहां वैज्ञानिक हर्बल माउथ फ्रेशनर जैसे नए उत्पादों पर काम कर रहे हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रेरित करते हुए कहा कि सफल स्टार्टअप बनाने के लिए ऊंची डिग्रियों की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निर्मित स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र से हर प्रतिभाशाली युवा को प्रशिक्षण, फंडिंग और मेंटरशिप मिल रही है।”
इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में राष्ट्रीय क्वांटम मिशन सेंटर (नोएडा), सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का पुनर्जीवन, लखनऊ में बायोटेक्नोलॉजी पार्क और साइंस म्यूज़ियम की स्थापना जैसी योजनाओं की भी जानकारी दी।
स्टार्टअप कॉन्क्लेव में बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों, उद्यमियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के साथ ही लखनऊ ने खुद को वैज्ञानिक और उद्यमी परिदृश्य में देश के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है।
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