कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। कुशीनगर में गन्ना खेत में आग लगने की बड़ी घटना सामने आई है। रामकोला थाना क्षेत्र के बिहुली गांव में अचानक लगी आग से आधा दर्जन गन्ना किसानों की खड़ी फसल जलकर राख हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बगल के खेत में गन्ने की सूखी पत्तियां जलाई जा रही थीं, तभी आग बेकाबू होकर दूसरे खेतों तक पहुंच गई। इस कुशीनगर में गन्ना खेत में आग की घटना से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
घटना रामकोला थाना क्षेत्र के गांव बिहुली की है, जहां सुसीली यादव उर्फ हेमंत पुत्र सत्तन यादव समेत करीब आधा दर्जन किसानों की गन्ने की फसल आग की चपेट में आ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक खेत में गन्ने की पत्तियां साफ करने के दौरान आग जलाई गई थी, लेकिन तेज हवा के कारण आग तेजी से फैल गई और आसपास के खेतों को अपनी चपेट में ले लिया। कुशीनगर में गन्ना खेत में आग फैलते ही ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई।
ग्रामीणों ने तत्काल बाल्टियों, पंपसेट और ट्रैक्टर की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक कई बीघा गन्ना जल चुका था। कुशीनगर में गन्ना खेत में आग की इस घटना से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। किसानों का कहना है कि गन्ना उनकी मुख्य नकदी फसल है और इसी पर पूरे साल की आजीविका निर्भर रहती है।
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लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान
स्थानीय किसानों के अनुसार, जली हुई फसल की कीमत लाखों रुपये में आंकी जा रही है। सुसीली यादव उर्फ हेमंत ने बताया कि फसल कटाई के लिए तैयार थी और कुछ ही दिनों में गन्ना मिल में भेजा जाना था। कुशीनगर में गन्ना खेत में आग लगने से उन्हें भारी आर्थिक झटका लगा है। अन्य प्रभावित किसानों ने भी प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि खेतों में पत्तियां जलाने की प्रथा अक्सर अपनाई जाती है, लेकिन सावधानी नहीं बरती जाती। तेज हवा और सूखी फसल के कारण आग तेजी से फैल जाती है। कुशीनगर में गन्ना खेत में आग की यह घटना प्रशासन और किसानों दोनों के लिए चेतावनी है कि ऐसी गतिविधियों में सतर्कता बेहद जरूरी है।
प्रशासन को सूचना, जांच की मांग
घटना की सूचना स्थानीय पुलिस और राजस्व विभाग को दी गई है। राजस्व टीम द्वारा नुकसान का आकलन किए जाने की बात कही जा रही है। किसानों ने मांग की है कि कुशीनगर में गन्ना खेत में आग से प्रभावित सभी किसानों को तत्काल राहत राशि प्रदान की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में अवशेष जलाने से न केवल आग की घटनाएं बढ़ती हैं, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान होता है। कृषि विभाग समय-समय पर किसानों को जागरूक करता रहा है कि वे पत्तियां जलाने के बजाय वैकल्पिक तरीकों का उपयोग करें। इसके बावजूद ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
किसानों के लिए सावधानी जरूरी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, गन्ने की पत्तियां जलाते समय अग्निशमन के इंतजाम, पानी की उपलब्धता और हवा की दिशा का ध्यान रखना चाहिए। खेतों के बीच फायर लाइन बनाना भी आवश्यक है, ताकि आग एक खेत से दूसरे खेत तक न फैले। कुशीनगर में गन्ना खेत में आग जैसी घटनाएं तभी रोकी जा सकती हैं जब सामूहिक स्तर पर सतर्कता बरती जाए।
फिलहाल प्रभावित किसान प्रशासनिक मदद की आस लगाए हुए हैं। यदि समय रहते राहत नहीं मिली, तो उन्हें कर्ज और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। यह घटना न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर डालती है, बल्कि पूरे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।
कुशीनगर में गन्ना खेत में आग की इस घटना ने एक बार फिर खेतों में अवशेष जलाने की खतरनाक प्रवृत्ति को उजागर किया है। प्रशासन, कृषि विभाग और किसानों को मिलकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
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