जम्मू-कश्मीर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) डोडा जिले में भ्रष्टाचार निरोधक अदालत ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के दो अभियंताओं को रिश्वत लेने के 13 साल पुराने मामले में गुरुवार को दोषी ठहराया। यह मामला 2011 में दर्ज हुआ था, जब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में 45,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए कनिष्ठ अभियंता राजा फैसल को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान सहायक कार्यकारी अभियंता सैयद इखलाक हुसैन पीर की संलिप्तता भी सामने आई। एसीबी के मुताबिक, दोनों अभियंताओं ने एक ठेकेदार से सड़क निर्माण के भुगतान की शेष राशि जारी करने के बदले घूस की मांग की थी।
विशेष न्यायाधीश अर्चना चरक ने दोनों अभियंताओं को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) तथा धारा 161 (भ्रष्टाचार से संबंधित अपराध) के तहत दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई।
अदालत ने प्रत्येक अभियंता को तीन अलग-अलग धाराओं के तहत एक-एक वर्ष का कठोर कारावास और कुल 30,000 रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया।
एसीबी ने बताया कि यह मामला डोडा-गनेका सड़क पर तारकोल बिछाने का काम करने वाले एक ठेकेदार की शिकायत पर दर्ज हुआ था। ठेकेदार का 75 प्रतिशत भुगतान पहले ही हो चुका था, लेकिन शेष राशि जारी करने के लिए अभियंताओं ने 45,000 रुपये की रिश्वत मांगी।
इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश माना जा रहा है।
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