देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l विकास खंड बैतालपुर के पशुधन प्रसार अधिकारी निशाकान्त तिवारी ने पशुपालकों को जागरूक किया कि लेप्टोस्पायरोसिस पैदा करने वाले बैक्टीरिया मवेशियों, सूअरों, घोड़ों, कुत्तों व चूहों आदि में पाए जाते हैं। लेप्टोस्पायरोसिस जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाला एक महत्वपूर्ण रोग है। मनुष्यों में इस बीमारी का प्रकोप आमतौर पर संक्रमित जानवरों के मूत्र से दूषित मिट्टी व पानी के संपर्क में आने से होता है।
अनुमान है कि दुनिया भर में हर साल 10 लाख से ज़्यादा लोग लेप्टोस्पायरोसिस से पीड़ित होते हैं। इनमें से लगभग 60,000 लोग इससे मर जाते हैं।लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं और इसमें आमतौर पर बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और दस्त शामिल होते हैं। कुछ मामलों में पीलिया (त्वचा और आँखों का पीला पड़ना), चकत्ते और लाल आँखें भी दिख सकती हैं। गंभीर मामलों में गुर्दे, यकृत या फेफड़ों की विफलता और मेनिन्जाइटिस जैसी जटिलताएँ हो सकती हैं।
इस बीमारी से बचाव हेतु साफ सफाई जरूरी है। पशु बाड़ा निवास स्थान से दूर बनवाएं। पशुओं के मल मूत्र आस पास एकत्र न होने दें। जानवरों के आसपास हैं तो साबुन और पानी साथ धोएं ।अगर साबुन पानी उपलब्ध न हो तो सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। अगर जानवरों के आसपास रहना होता है तो कोई भी घाव होने पर तुरंत इलाज करवाएं। घाव होने और त्वचा के काटने पर ठीक होने तक जानवर से दूर रहें। किसी जानवर के यूरिन के संपर्क में आए हैं तो तुरंत साबुन पानी से अच्छी तरह से नहा लें।
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