मऊ।(राष्ट्र की परम्परा)
देश को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति से मुक्त करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे बाल विवाह मुक्त भारत अभियान मऊ के अंतर्गत जनपद मऊ में 100 दिवसीय विशेष कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिलाधिकारी महोदय एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी महोदया के दिशा-निर्देश में महिला कल्याण विभाग द्वारा दिनांक 04 फरवरी 2026 को चन्द्रा पब्लिक स्कूल, मऊ में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर महिला कल्याण विभाग के हब फॉर इंपॉवरमेंट ऑफ वूमेन की समस्त टीम द्वारा छात्र-छात्राओं को बाल विवाह के दुष्परिणामों, उससे जुड़े कानूनों एवं सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य किशोर-किशोरियों को जागरूक कर उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाना तथा समाज में बाल विवाह के विरुद्ध मजबूत जन-आंदोलन तैयार करना रहा।
बाल विवाह कानूनन अपराध – बच्चों को दी गई स्पष्ट जानकारी
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित बाल कल्याण समिति की सदस्य/मजिस्ट्रेट श्रीमती अनीता सिंह यादव ने छात्र-छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम एवं बाल विवाह निषेध कानून के बारे में सरल और स्पष्ट शब्दों में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की या 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह किया जाता है, तो वह बाल विवाह की श्रेणी में आता है, जो कानूनन गंभीर अपराध है।
उन्होंने बच्चों को बताया कि बाल विवाह कराने, उसमें सहयोग करने या उसे प्रोत्साहित करने वालों के खिलाफ 2 वर्ष का कठोर कारावास और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। यह जानकारी छात्रों के लिए न केवल शिक्षाप्रद रही, बल्कि उन्हें अपने भविष्य को लेकर सजग बनाने वाली भी साबित हुई।
बाल विवाह रोकने में समाज की भूमिका पर जोर
श्रीमती अनीता सिंह यादव ने कहा कि बाल विवाह केवल एक कानूनी अपराध नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपील की कि यदि उनके आसपास कहीं भी बाल विवाह होता दिखाई दे, तो वे चुप न रहें और तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचना दें। समय पर दी गई सूचना से किसी बच्चे का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।
सरकारी योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान मऊ के अंतर्गत बच्चों और किशोरियों को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। महिला कल्याण विभाग की टीम ने बताया कि सरकार बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है, जिनमें प्रमुख रूप से—
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना
स्पॉन्सरशिप योजना
महिला हेल्पलाइन सेवा
वन स्टॉप सेंटर
इन योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों और महिलाओं को आर्थिक सहायता, परामर्श, सुरक्षा और कानूनी सहयोग प्रदान किया जाता है।
‘बाल विवाह मुक्त भारत’ की दिलाई गई शपथ
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शपथ दिलाई गई। शपथ के माध्यम से सभी ने यह संकल्प लिया कि वे स्वयं बाल विवाह नहीं करेंगे, न ही अपने आसपास किसी भी बाल विवाह को होने देंगे और आवश्यकता पड़ने पर इसकी सूचना संबंधित विभाग को देंगे।
विद्यालय परिसर में दिखा जागरूकता का सकारात्मक माहौल
चन्द्रा पब्लिक स्कूल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान छात्रों में विशेष उत्साह और जिज्ञासा देखने को मिली। उन्होंने बाल विवाह, पॉक्सो एक्ट और सरकारी योजनाओं से संबंधित सवाल पूछे, जिनका महिला कल्याण विभाग की टीम द्वारा विस्तार से उत्तर दिया गया।
कार्यक्रम में रहे ये प्रमुख लोग उपस्थित
इस अवसर पर हब फॉर इंपॉवरमेंट ऑफ वूमेन टीम से—
जिला मिशन समन्वयक श्रीमती अर्चना राय
जेंडर स्पेशलिस्ट तृप्ति राय
जेंडर स्पेशलिस्ट राखी राय
एम.टी.एस. शाहबाज अली
सहित विद्यालय के प्रिंसिपल के. सी. पीटर, समस्त शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
बाल विवाह उन्मूलन की दिशा में मजबूत पहल
जनपद मऊ में चलाया जा रहा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान मऊ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक सशक्त प्रयास है। प्रशासन और महिला कल्याण विभाग का यह संयुक्त अभियान न केवल कानून की जानकारी दे रहा है, बल्कि बच्चों को आत्मविश्वासी और जागरूक नागरिक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक समाज का हर वर्ग इस अभियान से नहीं जुड़ेगा, तब तक बाल विवाह जैसी कुप्रथा को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है। ऐसे में स्कूलों में आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम भविष्य की पीढ़ी को सुरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
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