देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के तहत बाल श्रम उन्मूलन अभियान को वर्ष 2027 तक पूरी तरह सफल बनाने के लिए देवरिया में जागरूकता अभियान को और तेज कर दिया गया है। सहायक श्रमायुक्त स्कन्द कुमार ने बताया कि शासन ने प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बाल श्रम उन्मूलन अभियान के अंतर्गत ऐसे बच्चों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़कर उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य, सुरक्षा और कौशल विकास सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही स्किल डेवलपमेंट के माध्यम से परिवारों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना भी अभियान का मुख्य लक्ष्य है।
सहायक श्रमायुक्त ने व्यापारिक प्रतिष्ठानों, दुकानदारों, होटल स्वामियों, फैक्ट्री मालिकों, टेंट हाउस, मैरिज हॉल संचालकों और अन्य नियोक्ताओं को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार के कार्य में लगाना अवैध और दण्डनीय अपराध है। इसके अलावा, 14 से 18 वर्ष आयु के किशोरों को खतरनाक कार्यों में नियोजित करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बाल श्रम कराते पाए जाने पर 6 माह से 2 वर्ष तक का कारावास, अथवा ₹20,000 से ₹50,000 तक का जुर्माना, अथवा दोनों दंडों का प्रावधान है। पुनरावृत्ति की स्थिति में और भी कठोर दंड लागू होंगे।
जनता से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी बाल श्रम होता दिखाई दे, तो तुरंत श्रम विभाग देवरिया या जिला टास्क फोर्स को सूचित करें। इसके साथ ही चाइल्डलाइन नंबर 1098 पर कॉल करके भी सूचना दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि बाल श्रम उन्मूलन अभियान तभी सफल होगा, जब समाज मिलकर आगे आए और बच्चों को सुरक्षित व सम्मानजनक बचपन दिलाने में सहभागी बने।
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