छठिमैया मोरी विनती बारम्बार,
स्वीकारौ अर्ध्य हमार।
छठिमैया बड़का परब बरत पूजा बा,
यामे कौनो पंडित नाहीं,
कोउ नाहीं पूजारी,
सूरज देवता अर्ध्य लेवत हैं,
डूबत उगत तैयारी,
डूबत सूरजन का पूजत बा
सब भोले नर नारी।
छठिमैया मोरी विनती….
सबय करत बरत औ पूजन,
ना कोउ ऊँच ना नीचा,
लोकगीत पुरबिया गावैं,
गावैं सबय बरतधारी,
सब पकवान घरै मा बनावत
लरिका बिटिया खाईं,
सगरी रात घाट भरि नहावैं
कोऊ ऊँच न नीच जनाईं।
छठिमैया मोरी विनती ……
टोकरियाँ भरि भरि बटत परसदवा
अमीरौ गरीबवा खाई,
बहुतै श्रद्धा भगति करत सब पूजत
सूरज औ छठि माई,
लगातार छत्तीस घंटा तक बरती
बिन खाये पिये रहि जाई,
छठिमैया मोरी विनती बारम्बार,
स्वीकारौ अर्ध्य हमार।
बढ़ै सामाजिक सौहार्द, सदभाव,
आस्था व विश्वास,
शांति, समृद्धि व सादगी आवति
छठिमैया भरती घर द्वार,
पवित्रता का महापरब है,
फ़ूलैं फलैं सब सपरिवार,
आदित्य देत बधाई औ शुभकामना
सब करौ स्वीकार।
छठिमैया मोरी विनती…..
कर्नल आदि शंकर मिश्र, आदित्य
लखनऊ
सांकेतिक धनबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। धनबाद के निरसा क्षेत्र में पुलिस और अपराधियों के…
EPFO की वेतन सीमा 15 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये, 51 लाख से अधिक…
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा UPI MDR विवाद, ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% शुल्क…
विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच 2026: क्या प्लास्टिक और ई-कचरे का कबाड़ बनेगा नई अर्थव्यवस्था की…
वाराणसी(राष्ट्र क़ी परम्परा)मंडल रेल प्रबंधक, वाराणसी आशीष जैन के निर्देशानुसार तथा वरिष्ठ मंडल आंकड़ा एवं…
16 नवंबर से 30 नवंबर तक चलेगी स्वगणना, एक दिसंबर से शुरू होगी जनसंख्या गणना…