पिछले तीन दशकों से अध्यक्ष पद सिर्फ चार घरों तक सीमित
उतरौला/बलरामपुर (राष्ट्र की परम्परा)
निकाय चुनाव नजदीक आते देख तमाम नए चहरे अपनी अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं।जिसके लिए उम्मीदवार सोशल मीडिया का जमकर प्रयोग कर रहे हैं।हालाकि अभी तक आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नही है ऐसे में दावेदारों के दरमियान सस्पेंस बना हुआ है।
अध्यक्ष पद की सीट के लिए उम्मीदवार के साथ साथ जनता के बीच कयासों का दौर जारी है।आरक्षण को लेकर सभी के अलग अलग मत हैं। नगर के बस स्टाप, श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौराहा के बगल चाय की दुकान,पान की गुमटी आदि के पास जमा लोगों में न सिर्फ आरक्षण को लेकर चर्चा जारी है,बल्कि लोग उम्मीदवारों की नाप तौल भी कर रहे हैं।सीट को लेकर अगर मगर के बीच लोग प्रत्याशियों को लेकर अपने अपने विचार बयां कर रहे हैं।अगर अध्यक्ष पद की सीट अनारक्षित रहती है तो किसका पलड़ा भारी है और अगर सीट आरक्षित होती है तो कौन सा प्रत्याशी उपयुक्त रहेगा।हालाकि राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है इस बार सीट बदलना तय है।बता दें कि पिछली पंचवर्षीय में अध्यक्ष पद की सीट सामान्य पुरूष के लिए आरक्षित थी जिस पर सपा के सिंबल से चुनाव लड़े मोहम्मद इदरीश खां को कामयाबी मिली थी।राजनीति के जानकारों का मानना है इस बार अध्यक्ष पद की सीट परिवर्तन होना लगभग तय है।अगर सीट परिवर्तन होता है तो इस बार उतरौला को चेयरमैन के रूप में नया चेहरा मिल सकता है।पिछले 30 वर्षों से अध्यक्ष पद सिर्फ चार घरों तक सीमित रहा। जिसमें एक बार इदरीश खां,व एक बार उनकी पत्नी अफसर जहां,और एक बार पूर्व विधायक विश्वनाथ गुप्ता,एक बार अमरनाथ गुप्ता,एक बार तैय्यब अली एडवोकेट की पत्नी रोशन जहां ,तथा एक बार अनूप चंद गुप्ता ने जीत दर्ज की है।
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