बजट 2026-27 @ विज़न 2047: लोकलुभावनवाद से आगे आत्मनिर्भर विकसित भारत की वैश्विक रूपरेखा

शेयर बाजार और सोना-चांदी में गिरावट के बीच दीर्घकालिक आर्थिक अनुशासन का साहसिक संदेश

गोंदिया (विशेष लेख)


भारत का केंद्रीय बजट 2026-27 किसी चुनावी वर्ष की तात्कालिक लोकप्रियता का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि विज़न 2047 के अनुरूप एक आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की ठोस रणनीति है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत यह बजट शॉर्ट-टर्म लोकलुभावन घोषणाओं से दूर रहकर दीर्घकालिक आर्थिक अनुशासन और कैपेक्स-ड्रिवन ग्रोथ पर केंद्रित दिखाई देता है।
बजट पेश होते ही शेयर बाजार, सोना-चांदी के भाव में तेज गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, इस तात्कालिक बाजार प्रतिक्रिया के विपरीत, यह बजट भारत की आर्थिक परिपक्वता और रणनीतिक आत्मविश्वास का स्पष्ट संकेत देता है। चौंकाने वाली घोषणाओं के अभाव को कमजोरी नहीं, बल्कि नीति-निर्माण की गंभीरता और निरंतरता के रूप में देखा जाना चाहिए।

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बजट की वैचारिक संरचना में बदलाव
75 वर्षों की बजट परंपरा में इस बार एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण परिवर्तन दिखा। नीतिगत घोषणाओं को आर्थिक दर्शन से अलग नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें एक सतत कथा में पिरोया गया। यह दर्शाता है कि सरकार अब कर नीति, पूंजी निवेश, तकनीकी मिशन और सामाजिक ढांचे को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य—आत्मनिर्भर विकसित भारत—की दिशा में आगे बढ़ा रही है।
पेपरलेस बजट और डिजिटल प्रस्तुति शासन की आधुनिक सोच और पारदर्शिता को मजबूत करती है।

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वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत का अनुशासन
अमेरिका-चीन व्यापार तनाव, यूरोप की ऊर्जा चुनौतियां और वैश्विक सप्लाई-चेन पुनर्संरचना के दौर में भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह लोकलुभावनवाद के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देगा। वित्त मंत्री के 90 मिनट के भाषण में निरंतरता, स्थिरता और भविष्य-दृष्टि प्रमुख रही।
कैपेक्स-ड्रिवन ग्रोथ: बजट की रीढ़
वित्तवर्ष 2026-27 के लिए 13.2 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया गया है, जो पिछले वर्ष से लगभग 9% अधिक है। बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और शहरी विकास में यह निवेश रोजगार सृजन के साथ-साथ निजी निवेश को भी आकर्षित करेगा। यह एक स्पष्ट क्राउड-इन रणनीति है, जहां सरकारी निवेश निजी क्षेत्र के लिए नए अवसर खोलता है।

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सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और तकनीकी आत्मनिर्भरता
लगभग 40,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 भारत को केवल सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि हार्डवेयर निर्माण की वैश्विक वैल्यू-चेन में निर्णायक भूमिका निभाने की दिशा में ले जाएगा। यह पहल आयात निर्भरता घटाने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी।

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हाई-स्पीड रेल और रणनीतिक कॉरिडोर
मुंबई-पुणे, हैदराबाद-बेंगलुरु और दिल्ली-वाराणसी सहित 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर केवल परिवहन परियोजनाएं नहीं, बल्कि औद्योगिक और शहरी विकास के नए गलियारे हैं।
इसके साथ ही रेयर अर्थ कॉरिडोर और ईस्ट-वेस्ट फ्रेट कॉरिडोर भारत को रणनीतिक संसाधनों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम हैं।
एमएसएमई, बायोफार्मा और समावेशी विकास
10,000 करोड़ रुपये का SME ग्रोथ फंड
बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत 10,000 करोड़ रुपये का निवेश
छोटे और मध्यम शहरों के लिए सिटी इकोनॉमिक रीजन योजना
ये सभी पहलें रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती देती हैं।

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कर सुधार और ट्रस्ट-बेस्ड टैक्सेशन
सरल आयकर नियम, संशोधित रिटर्न की समय-सीमा में बदलाव और टीडीएस-टीसीएस में राहत—ये सभी कदम ट्रस्ट-बेस्ड टैक्सेशन की दिशा में आगे बढ़ते भारत को दर्शाते हैं।
हरित विकास और जलवायु संतुलन
कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव यह साबित करता है कि भारत विकास और पर्यावरण को पूरक मानकर चल रहा है।

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निष्कर्ष
समग्र रूप से बजट 2026-27 लोकलुभावनवाद से आगे बढ़कर विकसित भारत 2047 की ठोस नींव रखता है। यह बजट आज के लाभ के लिए कल को गिरवी नहीं रखता, बल्कि भविष्य की मजबूत आधारशिला वर्तमान में ही तैयार करता है।

लेखक/संकलनकर्ता:
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
कर विशेषज्ञ, स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक
गोंदिया, महाराष्ट्र

Editor CP pandey

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