सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)सिकन्दरपुर तहसील क्षेत्र में इस वर्ष कड़ाके की ठंड ने आमजन को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है, लेकिन राहत के लिए प्रस्तावित अलाव व्यवस्था अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। प्रशासन द्वारा चिन्हित 17 प्रमुख स्थानों—बस स्टेशन सिकन्दरपुर, नगरा मोड़, तहसील परिसर, पुरूषोतमपट्टी चट्टी, लखनापार चट्टी, बहेरी चट्टी, सिसोटार चट्टी, माल्दा चट्टी, बघुड़ी चट्टी, नवरतनपुर चट्टी, बंशी बाजार चट्टी, पूर चट्टी, खेजुरी (हथौज मोड़), हथौज चट्टी, खड़सरा (जिगिरिसड़ मोड़), पकड़ी और टंडवा—में एक भी जगह अलाव न जलना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। तेज होती शीतलहरी के बीच गरीब, असहाय, मजदूर, रिक्शा चालक और रात में बाहर रहने वाले लोग ठंड से बुरी तरह ठिठुर रहे हैं। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने स्वयं लकड़ियां जोड़कर अलाव जलाने का प्रयास किया, परंतु पर्याप्त सामग्री और निरंतर सप्लाई न होने से वे भी असफल हो रहे हैं। तहसीलदार सिकन्दरपुर ने शीतलहरी से राहत हेतु 255 राजस्व ग्रामों में रहने वाले गरीब व निराश्रित परिवारों के लिए कम्बलों की तत्काल आवश्यकता बताई है, लेकिन अलाव व्यवस्था की वास्तविक स्थिति बेहद खराब है। लोगों का आरोप है कि हर वर्ष केवल सूची बनाकर खानापूर्ति कर दी जाती है, जबकि मैदान में तैयारी नहीं दिखती।स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द अलाव की व्यवस्था लागू कर सभी चिन्हित स्थलों पर लकड़ियों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि कमजोर वर्गों को कड़ाके की ठंड से राहत मिल सके।
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