पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का मतदान गुरुवार (6 नवंबर) को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर करीब 64.66% वोटिंग दर्ज की गई, जो पिछले चुनावों के मुकाबले ज्यादा है। जनता के उत्साह ने बिहार की राजनीति में नई ऊर्जा भर दी है। चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान के दौरान कुछ जगहों पर ईवीएम में तकनीकी दिक्कतें आईं, जिन्हें तुरंत ठीक कर दिया गया।
पहले चरण में महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव, वहीं एनडीए की तरफ से सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा जैसे बड़े चेहरे मैदान में थे। इसके अलावा जेडीयू अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और आरजेडी नेता भोला यादव भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
बिहार चुनाव 2025 की 10 बड़ी बातें
1️⃣ तकनीकी दिक्कतों में कमी: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद कुमार गुंजियाल ने बताया कि 2020 की तुलना में इस बार कम ईवीएम बदली गईं। केवल 1.21% बैलेट यूनिट्स और 1.34% कंट्रोल यूनिट्स बदली गईं, जबकि 2020 में यह संख्या क्रमशः 1.87% और 1.77% थी।
2️⃣ वीवीपैट में भी सुधार: इस बार सिर्फ 2.92% वीवीपैट मशीनें बदली गईं। पिछले चुनाव में यह आंकड़ा 4.9% था। करीब 3 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने 45,000 से ज्यादा बूथों पर मतदान किया।
3️⃣ महिलाओं की बढ़ी भागीदारी: चुनाव आयोग के अनुसार इस बार मतदान में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। कुल 926 मतदान केंद्र पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित थे, जबकि 107 केंद्र दिव्यांग कर्मियों ने संभाले।
4️⃣ कुल उम्मीदवार: पहले चरण में 1,314 प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें 1,192 पुरुष और 122 महिलाएं शामिल हैं।
5️⃣ मतदान केंद्रों की संख्या: ग्रामीण इलाकों में 36,733 और शहरी क्षेत्रों में 8,609 मतदान केंद्र बनाए गए थे।
6️⃣ कुछ जगहों पर विरोध: बक्सर, फतुहा और सूर्यगढ़ा में मतदान बहिष्कार की खबरें आईं। कुल 143 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनका समाधान मौके पर किया गया।
7️⃣ हल्की झड़पें: लखीसराय में डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के विरोध की खबर आई। वहीं सारण में विधायक सत्येंद्र यादव की गाड़ी पर हमला हुआ, हालांकि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
8️⃣ पीएम मोदी का बयान: प्रधानमंत्री ने पहले चरण की वोटिंग के बाद कहा कि “बिहार में एनडीए को जनता का अपार समर्थन मिल रहा है और जीत तय है।”
9️⃣ अंतरराष्ट्रीय नजर: दक्षिण अफ्रीका, बेल्जियम, फिलीपींस, थाईलैंड, इंडोनेशिया और कोलंबिया से आए 16 प्रतिनिधियों ने बिहार की चुनाव प्रक्रिया का निरीक्षण किया — यह पहली बार हुआ है।
🔟 विशेष व्यवस्थाएं: दिव्यांग मतदाताओं के लिए ई-रिक्शा की सुविधा दी गई और 90 हजार से अधिक जीविका दीदियों को सुरक्षा बलों के साथ तैनात किया गया।
नतीजा क्या बताता है?
पहले चरण की वोटिंग ने साफ कर दिया है कि बिहार की जनता इस बार बदलाव और स्थिरता दोनों चाहती है। एक ओर महागठबंधन “सबको नौकरी” के वादे पर चुनाव लड़ रहा है, वहीं एनडीए “सुशासन और विकास” की नींव पर भरोसा जता रहा है।
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