भारतेन्दु सभागार में मनाई गई भीमराव अंबेडकर की जयंती

वाराणसी(राष्ट्र की परम्परा)
सोमवार को पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक(परिचालन) ज्ञानेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में मंडल कार्यालय के भारतेन्दु सभागार कक्ष में, बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर की 132 वीं जयंती मनाई गई । अपर मंडल रेल प्रबंधक(परिचालन) ज्ञानेश त्रिपाठी ने कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया । इस अवसर पर मुख्य परियोजना प्रबंधक(गतिशक्ति) कौशलेस सिंह ,वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी समीर पॉल,वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक ए के सिंह,वरिष्ठ मंडल इंजीनियर(समन्वय) राकेश रंजन,वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर (C&W) एस पी श्रीवास्तव,वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर (Enhm) अलोक केसरवानी,वरिष्ठ मंडल सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियर रजत प्रिय,वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक प्रीति वर्मा, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी आशुतोष शुक्ला,वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर(सामान्य) पंकज केशरवानी, वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर(कर्षण) आर एन सिंह, वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर(आपरेशन) अनिल श्रीवास्तव, वरिष्ठ मंडल आंकड़ा प्रबंधक नवनीत वर्मा,वरिष्ठ मंडल भण्डार प्रबंधक श्री ए के जायसवाल,मंडल कार्मिक अधिकारी विवेक मिश्रा,सहायक कार्मिक अधिकारी आनन्द कुमार,सहायक मंडल परिचालन प्रबंधक हीरा लाल,सहायक वाणिज्य प्रबंधक श्री ए के सुमन तथा कार्मिक विभाग के निरीक्षकों समेत अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी एशोसिएशन के सदस्यों,मजदूर यूनियन के पदाधिकारी एवं सीमित संख्या में कर्मचारियों ने बाबा साहब के तैल चित्र पर पुष्पांजलि समर्पित कर श्रद्धांजली दी ।
इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में अपर मंडल रेल प्रबंधक ने बताया कि बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर की 14 अप्रैल को जयंती होती है। डा आंबेडकर को भारतीय संविधान निर्माता के तौर पर जाना जाता है। उनकी भूमिका संविधान निर्माण में तो अतुल्य थी ही, साथ ही दलित समाज के उत्थान में भी महत्वपूर्ण रही। उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 में मध्य प्रदेश के महू में एक गांव में हुआ था। उस दौर में उन्हें आर्थिक और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। बेहद विषम परिस्थितियों में पढ़ाई करने वाले बाबा साहेब ने स्कूल में भी भेदभाव का सामना किया। डा आंबेडकर का जीवन संघर्ष और सफलता की कहानी सभी के लिए प्रेरणा है। उनके विचार महिलाओं को पुरुषों के बराबर, अल्पसंख्यकों और गरीबों को अपने अधिकारों के लिए, आवाज उठाने के लिए प्रेरित करते हैं। वह उस वक्त समाज में व्याप्त भेदभाव से लड़कर अपनी काबिलियत के दम पर आजाद भारत के पहले कानून मंत्री के पद तक पहुंचे। 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न भी दिया गया।
बाबा साहब स्वयं एक मजदूर नेता भी थे उन्हें श्रमिकों की समस्याओं की पूर्ण जानकारी थी साथ ही वे स्वयं एक माने हुए अर्थशास्त्री होने के कारण उन स्थितियों के सुलझाने के तरीके भी जानते थे। इसी लिये उनके द्वारा सन 1942 से 1946 तक वायसराय की कार्यकारिणी में श्रम मंत्री के समय मं श्रमिकों के लिये जो कानून बने और जो सुधार किये गये वे बहुत ही महत्वपूर्ण एवं मूलभूत स्वरूप के हैं। सन 1942 में जब बाबा साहेब वायसराय की कार्यकारिणी समिति के सदस्य बने थे तो उन के पास श्रम विभाग था जिस में श्रम, श्रम कानून, कोयले की खदानें, प्रकाशन एवं लोक निर्माण विभाग थे। बाबा साहब भारत ही नही बल्कि सम्पूर्ण विश्व की एक महान विभूति थे जिन्होंने अपने जीवन के संघर्षों को अपनी अटूट लगन, ज्ञान एवं परिश्रम के सहारे उन्होंने पीछे छोड़ा और सम्पूर्ण समाज के लिए एक मिसाल छोड़ी । उन्होंने समाज में व्याप्त बिखराव और असमानता की संकीर्णताओं से बाहर निकलने का रास्ता खोजा और दूसरों के लिए राह आसान बनायी।
बाबा साहब ने अपने जीवन में एक अद्वितीय उदाहरण बनकर तमाम वंचितों उपेक्षितों और बेसहारा लोगों के लिये प्रेरणास्रोत बनकर एवं मार्गदर्शन देकर शिक्षा और समानता को मौलिक अधिकार के रूप में स्थापित करके सारे समाज को एक राह पर लाने का अविस्मरणीय कार्य किया । उनके द्वारा दिखाये गये मार्ग पर चलकर सामूहिक रूप से एक शिक्षित, सभ्य, संवेदशील समाज के रूप में समग्र उन्नति करेगा, ऐसा मेरा विश्वास है। इन्हीं शब्दों के साथ हम सब बाबा साहब के प्रति हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
इस अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में कल्लू राम सोनकर/मंडल मंत्री अनुसूचित जाति एवं जनजाति कर्मचारी एशोसियेशन, बी एन यादव मंडल मंत्री/पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कर्मचारी एशोसियेशन तथा मंडल मंत्री एन ई रेलवे मजदूर यूनियन एन.बी.सिंह ने बतलाया कि किस प्रकार बाबा साहब डॉ. अंबेडकर ने देश में श्रम सुधारों में भी अहम भूमिका निभाई। अंबेडकर ने श्रमिक संघों को बढ़ावा दिया और अखिल भारतीय स्तर पर रोजगार कार्यालयों की शुरुआत की। नवंबर, 1942 को नई दिल्ली में भारतीय श्रम सम्मेलन के 7 वें सत्र में उन्होंने 8 घंटे के कार्य दिवस को भारत में लाया, जो पहले 14 घंटे होता था। डॉ अम्बेडकर ने श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों की सुरक्षा के लिए 1942 में त्रिपक्षीय श्रम परिषद की स्थापना की, मजदूरों को रोजगार देने और मजदूर संघों की अनिवार्य मान्यता शुरू करके और श्रमिक आंदोलन को मजबूत करने के लिए श्रमिकों और नियोक्ताओं को समान अवसर दिया। न्यूनतम मजदूरी अधिनियम डॉ अंबेडकर का योगदान था, इसलिए मातृत्व लाभ विधेयक महिला श्रमिकों को सशक्त बनाता था। यदि आज भारत में एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज हैं, तो यह डॉ अंबेडकर की दृष्टि के कारण है । यदि श्रमिक अपने अधिकारों के लिए हड़ताल पर जा सकते हैं, तो यह बाबासाहेब अम्बेडकर की वजह से है उन्होंने श्रमिकों द्वारा ‘राइट टू स्ट्राइक को स्पष्ट रूप से मान्यता दी थी। 8 नवंबर 1943 को डॉ अंबेडकर ने ट्रेड यूनियनों की अनिवार्य मान्यता के लिए भारतीय व्यापार संघ (संशोधन) विधेयक लाया। यह सुरक्षित रूप से कहा जा सकता है कि यदि भारत में श्रमिकों के अधिकार है, तो यह डॉ अंबेडकर की कड़ी मेहनत और उनकी वैश्विक सोच के कारण है।
बाबा साहब ने राष्ट्र के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया ,समाज में समानता स्थापित की ,महिलाओं गरीबों एवं वंचितों को अधिकार दिलाया ,मजदूरों के काम के घंटे का निर्धारण कराया ,साप्ताहिक विश्राम आदि दिलाने का अद्वितीय कार्य किया । कार्यक्रम का संचालन मुख्य हित निरीक्षक राहुल भट्ट ने एवं धन्यवाद ज्ञापन मंडल कार्मिक अधिकारी विवेक मिश्रा ने किया ।

rkpnews@desk

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