रामपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। आजम खां जेल मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। दो पैन कार्ड मामले में सात साल की सजा काट रहे सपा नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से मिलने बुधवार को परिवार के सदस्य रामपुर जिला कारागार पहुंचे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने स्वयं मुलाकात करने से इंकार कर दिया, जिससे परिवार को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम पर जेल प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है, जिससे मामले को लेकर और सवाल खड़े हो रहे हैं।
बुधवार सुबह आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा, बड़े बेटे अदीब आजम और बहन निखहत मुलाकात की अर्जी लेकर जेल पहुंचे थे। जेल सूत्रों के अनुसार, परिवार की अर्जी स्वीकार हुई, लेकिन आजम और अब्दुल्ला ने मिलने से मना कर दिया। जबकि प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग मुलाकात के लिए पहुंच रहे हैं, परंतु कई दिनों से किसी की मुलाकात नहीं हो पा रही है।
इस बीच आजम खां जेल मामला से जुड़े अन्य मुकदमों की सुनवाई भी प्रभावित रही। फांसीघर की जमीन पर कब्जे के मामले में बुधवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन अदालत में कार्यवाही नहीं हो सकी। अब इस मामले की नई तारीख 23 दिसंबर तय की गई है।
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इसी तरह, अब्दुल्ला आजम के खिलाफ वोटरों को धमकाने के मामले में भी सुनवाई नहीं हो सकी। एमपी/एमएलए कोर्ट में सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन गवाह के कोर्ट न पहुंचने पर तारीख बढ़ा दी गई। इस मामले की भी अगली सुनवाई 23 दिसंबर को होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, आजम खां जेल मामला सपा की राजनीति और उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था चर्चा का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। लगातार टलती सुनवाई और जेल में मुलाकात से इनकार ने इस केस को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
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